Monday, December 8, 2025
Down To Earth **Launch of integrated forum on Climate Change and TradeSector: Trade and commerce Purpose: To create a permanent. politically supported space for countries to address increasingly contentious intersection between trade policies and climate action**Declaration on information integrity on climate changeSector: ClimatePurpose: To uphold integrity ofpublic information, protect scientists and journalists and counter spread of false narratives undermining climate action**Launch of ocean taskforceSector: ClimatePurpose: To build on BlueNationally Determined Contributions (NDC) Challenge, which encourages countries to set ocean protection targets when updating NDCs, and integrate oceans into a global mechanism accelerating adoption of marine solutions in national climate plans**Belém 4x Pledge on Sustainable FuelsSector: EnergyPurpose: To provide politicalsupport and promote international cooperation to increase at least fourfold the use of sustainable fuels by 2035, from 2024 levels, through implementation of policies**Resilient Agriculture Investment for net-Zero land degradation acceleratorSector: AgriculturePurpose: To restore degradedfarmland and mobilise finance. It is designed to help governments map degraded land, identify viable restoration projects and build financing tools for private capital.*****Belém Health Action PlanSector: HealthPurpose: World's first international climate adaptation framework dedicated entirely to health. The plan provides a roadmap for countries to confront escalating climate-related health threats, from heatwaves and vector-borne diseases to disruption of food and water systems.**Belém Declaration on Hunger, Poverty, and Human-Centered Climate ActionSector: DevelopmentPurpose: To call for a pivotal shift in how the international community addresses the climate crisis, recognising that, while climate change affects everyone, its devastating impacts fall disproportionately on the world's poorest communities.**Declaration for a Global Transport EffortSector: MobilityPurpose: To align the transport sector, the second-largest emitting sector, with the 1.5°C goal. The declaration calls for a global transport effort to achieve by 2035, a 25% drop in overall energy demand from transport, and shift one-third of transport energy to sustainable biofuels and renewable sources, with differentiated pathways**Tropical Forest Forever FacilitySector: BiodiversityPurpose: To provide long-term, self-financing support for tropical forest conservation. It was launched with US $5.5 billion in commitments, with a long-term goal of raising $125 billion. At least 20% of all payments will flow directly to Indigenous Peoples and Local Communities.*******Transport decarbonization in India, Mexico and EuropeSector: MobilityPurpose: India will deploy 15,000 zero-emission trucks, 1,500 electric vehicle charging Infrastructure units, and 78 MW renewable energy supply capacity by 2030; Mexico will deploy over 17,000 zero-emission vehicles by 2030; and Europe will deliver a European transport decarbonisation action strategy**Plan to Accelerate Minerals for the Transition and CircularitySector: EnergyPurpose: To overcome primary challenges to the clean energytransition: improving supply chain data quality, coordinating to expand electricity grids, embedding circularity and resilience into supply chains, and enabling developing economies to move up the clean power value chain through investment and skills partnerships.**Farmers' Initiative for Resilient and Sustainable TransformationsSector: AgriculturePurpose: To reduce methaneand nitrous oxide emissions from the agriculture sector, two potent greenhouse gases that together account for 40% of human-emitted methane and 75% of nitrous oxide.**Belém Gender Action PlanSector: DevelopmentPurpose: To ensure women and girls are placed at centre of climate policies with new provisions on health, violence and protection for women environmental defenders
Tuesday, October 21, 2025
मेडिकल 62 साल का
#PGIMS
UHS ,Rohtak completes 10 years
Medical कॉलेज 62 साल का
मैं मैडीकल कालेज
मेरी यात्रा नहीं ज्यादा पुरानी
महज 62 साल की उम्र
1960-61 में सोचा गया रचा गया
कुछ लोगों ने मांग की
इतिहास इसका साक्षी है
विचारों , द्वन्दों संघर्षों के बीच
जन्म हुआ है मेरा
करना शुरू किया मैने अपना
रूप धारण
धीरे धीरे मेरा वजूद
सामने आया
मैंने आत्मसात किया
खुशियों और गमों को
जन जन के दुख और सुखों वास्ते
अनेक बार संकट झेले मगर
कदम आहे ही बढ़ते चले गए
बार बार मरीजों का हितेषी बना
कभी जन विरोधी रुख भी रहा
समय काल की सीमाओं में
मेरा विकास तय हुआ
राज्य के सामाजिक हालातों ने भी
मेरा विकास किया और
मेरी सीमाएं तय की
लेकिन मेरा
केवल यही पक्ष नहीं है
मैन न्याय का साथ दिया
इलाज सीखा और सिखाया
कमजोरियों का पर्दाफाश किया
नये विचारों के बीज बोये और
कई बदलाओं ने जन्म लिया
नई खोज की पूरी लग्न से
लोगों के दुखदर्द उनकी पीड़ा को
मैंने दिल की धड़कन बनाया
इस तरह मेरा
समजिक बोध विशाल बना
और मैं अधिक संवेदनशील हुआ
मैं मैडीकल कालेज
भविष्य की सम्भावनाएं दिखाता
जन जन को बीमारी से निजात दिलाता
मैं लोगों में ही रहता हूँ
उनके बिना मेरा कोई वजूद नहीं
मेरे रेजिडेंट डॉक्टर
जी तोड़ मेहनत करते
सीनियर फैकल्टी भी ज्यान खपाती
पैरामैडीकल का योगदान
इनकी तिल तिल की मेहनत से
पलता बढ़ता
इनकी संवेदनशीलता की
नींव पर इस तरह मैंने
अपना रूप ग्रहण किया
मैं जन स्वास्थ्य का वाहक
लोगों के दिलों में बैठने का इच्छुक
अपने काम में जुटा रहता हूँ
चौबीस घण्टे दिन और रात
मैं मैडीकल कालेज
जात धर्म ऊंच नीच के
भेद लांघकर हर समुदाय की
सेवा को तत्पर
बहुत से लोगों ने रोल मॉडल का
रोल निभाया
राष्ट्रीय आंदोलन का प्रभाव
सिक्सटीज में नजर आया
डॉ इंदरजीत दीवान
डॉ प्रेमचंद्रा
डॉ विद्यासागर
डॉ जी एस सेखों
डॉ इंद्रबीर सिंह
डॉ पी एस मैनी
डॉ रोमेश आर्या
--///और भी कई
इनकी बदौलत मेरा कद
बढ़ा, फिर भी सन्तोष
नहीं किया मैंने
और रहा अग्रसर
चलता गया सन 1977 तक
एक दुर्घटना घटी और हमें
बांट गई
दो कदम आगे
एक कदम पीछे
फिर से साहस बटोरा मैंने
और जुट गया अपने काम में
और पहुंच गया नब्बे के दशक को पार कर
दो हजार के दशक में
**दो हजार आठ दो जून** को मैने
हैल्थ यूनिवर्सिटी की शक्ल
अख्तियार की या यूं कहें
प्रश्व पीड़ा के बाद मैं
पैदा हो गई।
आज में **10 वर्ष** की हो गई
मेरे जन्म के दौर में
जब में गर्भावस्था में थी
तब लोगों के दिलों में
मौजूद शंकाओं और रूढ़ियों के
बावजूद मैंने जन्म लिया और
अपना विकास किया
पूरे हिन्दुस्तांन में इस नन्ही
गुड़िया ने अपनी पहचान बनाई
मानवीय मूल्यों के उत्कर्ष तक
पहुंचे यहां कार्यरत लोग
पूरे हरियाणा में एक पहचान बनी
आहिस्ता आहिस्ता एक शक्ल ली
मैंने अपने पंख फैलाये
खेल कूद में मन लगाया
सांस्कृतिक धरातल पर भी
विकास किया मैंने
समाज के बहुत ही विरोधाभाषी
माहौल में लोगों की आवा जाही
के बीच कभी धीमी तो कभी तेज
मैंने मैडीकल शिक्षा
मैडीकल रिसर्च और
मरीज सेवा में कदम बढ़ाये
मुझे मालूम है कई कमियां हैं
मुझमें कई कमजोरियां हैं मेरी
कई खामियां हैं
कई का पूरा समाज जिम्मेवार
कई की सरकार जिम्मेवार
कई के खुद भी हम जिम्मेवार
कई के हालात जिम्मेवार
कमियों और कमजोरियों को
पहचानते हुए हम नए क्षितिज
की तरफ आगे बढ़ रहे
नया ओपीडी ब्लॉक
नया ट्रामा ब्लॉक
नया राज्य स्तरीय मेंटल अस्पताल
नया ऑडिटोरियम
नया सुपरस्पेसिलिटी ब्लॉक
नया मोड्यूलर आपरेशन थेटर
नया जच्चा बच्चा वार्ड
यह सब दिखा रहे हैं
जरूरतों के प्रति प्रतिबद्धता
आगे बढ़ना है अभी और मुझे
आप सब की मदद से
जनता के सहयोग से
और सरकार की उदारता पर
उम्मीद है कि हम सब मिलकर
लालच, तुच्छ स्वार्थों से ऊपर उठ कर
काली भेड़ों को अलग थलग करके
सच्ची मेहनत व लग्न के साथ
और ऊंचाइयों को छू लेंगे हम
पांच साल की बच्ची को जो
2008 में पैदा हुई
आज 2013 में पहुंच गई
सुरक्षित रखना जनता की
जिम्मेदारी है
स्टाफ का लोगों का साथ मिला
आगे बढ़ती चली गई
2014 से चलते चलते अब
कदम ताल करते हुए
2022 आ गया है
कई तरह की खूबियां भी
कुछ कमजोरियां भी
देखना है आगे का समो
सरकारी संस्थाओं के खिलाफ है
मुझे भी अहसास है
कोरोना महामारी में सिद्ध किया
सरकारी ढांचे ने ही आम जन के
स्वास्थ्य की देखभाल की है
जनता को भी अहसास हुआ कि
पीजीआईएमएस हमारा है
स्वास्थ्य के बारे जनता जागरूक
हो रही है।
यूनिवर्सिटी ने 10 साल अपने
पूरे 2 जून 2022 को आखिर
कर ही लिए
शुरू में डॉ सुखबीर सांगवान
ने वाईस चांसलरसिप संभाली
फिर डॉ ओ पी कालरा
और अब डॉ अनिता सक्सेना ने
जॉइन किया है
चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता की
चुनौतियां सामने खड़ी हैं
प्रशासन का केंद्रीय करण इन सालों में
बढ़ता ही गया है
चिकित्सा शिक्षा महंगी दर महंगी होती
ही गई और
यहाँ की फैकल्टी की
टीचर एसोसिएशन की
जायज मांगे भी नहीं सुनी जा
रही हैं, मानने की बात तो बहुत
दूर की बात है
चुनौतियां बड़ी हैं
तो फैकल्टी के हौंसले बुलंद हैं
देखिये आगे आगे होता है क्या?
रणबीर सिंह दहिया
Wednesday, October 15, 2025
hgvs
✍️ *हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति* ✍️
*दिनांक 05 अक्तूबर 2025 को हुई राज्य कार्यकारिणी की 16वीं मीटिंग की कार्यवाही*
आदरणीय साथियों,
राज्य कार्यकारिणी की 16वीं मीटिंग दिनांक 05 अक्तूबर 2025 को राज्य मुख्यालय, रामगोपाल कॉलोनी, रोहतक में हुई। जिसमें प्रमोद गौरी, सुरेश कुमार, सोहन दास, मनीषा, राममेहर, वेदपाल, नरेश प्रेरणा, रमेश चन्द्र, डाॅ. रणबीर सिंह दहिया, डाॅ. बलजीत भ्याण, अमृतलाल, मा. रामफल मलिक, शीशपाल, सतबीर नागल, मा. प्रमोद कुमार, सुलेखचन्द, विनोद मंगलोरा, सतीश चैहान और अनीता बगोटिया ने भाग लिया। जबकि नंदकिशोर, डा. धर्म सिंह, अनीता शर्मा, वेदप्रिय, वजीर सिंह, सतपाल आनन्द, शीतल, संदीप महिया, मदनपाल आदि विभिन्न कारणों से नहीं आ पाए।
*एजेंडे:*
*1. रिपोर्टिंग एवं समीक्षा:* एम.डी.यू. रोहतक में अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के उत्तरी जोन की 30-31 अगस्त को हुई मीटिंग/कार्यशाला, पिछली मीटिंग से अब तक की रिपोर्ट, सदस्यता एवं इकाईयों के गठन की स्थिति, बुलेटिन की सदस्यता, संगठन के संविधान के ड्राफ्ट पर आए सुझावों को शामिल कर अपडेट करना;
*2. भविष्य के काम :*
1) सांगठनिक सम्मेलन - इकाई, जिला एवं स्टेट और वित्तिय स्थिति एवं बजट,
2) वैज्ञानिक मानसिकता अभियान का दूसरा चरण,
3) कोर समूहों की सक्रियता बढ़ाना।
*रिपोर्टिंग एवं समीक्षा :*
1. गत 30-31 अगस्त को अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की नॉर्थ जॉन की मीटिंग/कार्यशाला एम.डी.यू. रोहतक में आयोजित की गई। जिसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा से 60 साथियों ने भाग लिया। इसमें शिक्षा, वैज्ञानिक मानसिकता, जेंडर एंड सोशल जस्टिस, स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु परिवर्तन पर रिसोर्स पर्सन्स द्वारा वक्तव्य रखे गए। जिन पर आपसी विचार-विमर्श कर भावी योजना बनाई गई। सभी के ठहरने, खाने, बैठने आदि की व्यवस्था सुचारू थी। एमडीयू प्रशासन का सहयोग बहुत अच्छा रहा। कार्यक्रम पर करीब ₹50000 खर्च हुआ। उक्त मीटिंग/कार्यशाला की पूर्व तैयारी हेतु HGVS, HVM और BGVS के प्रधान एवं सचिवों की संयुक्त मीटिंग ऑनलाइन आयोजित की गई थी। जिसमें पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करते हुए कार्य योजना बनाई गई थी। जिससे तीनों संस्थाओं की उपयुक्त भागीदारी हो गई थी लेकिन इसकी सभी तरह की तैयारियों एवं खर्च का अधिकतम बोझ HGVS को ही उठाना पड़ा। इस कार्यशाला में BGVS की ओर से कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाया।
2. विभिन्न जिलों द्वारा वर्ष 2025-26 की सदस्यता का नवीनीकरण किया है और बुलेटिन के स्थाई पाठक भी बनाए गए हैं। अधिकतर जिलों में सचिवमण्डल या कार्यकारिणी की मीटिंगें हुई हैं। जिलों की रिपोर्ट अनुसार जीन्द में 300, हिसार में 109, कैथल में 50, पानीपत में 150, करनाल में 125, भिवानी में 35 की सदस्यता किए जाने की रिपोर्ट की गई है जबकि कुछ जिले अभी भी सदस्यता करने की इच्छा रखते हैं। जबकि रोहतक और फतेहाबाद में अभी तक कोई सदस्यता नहीं हो पाई है। (कुल 769) इसके अलावा जिले अपनी-अपनी सदस्यता की कॉपी व सूची एवं सदस्यता राशि जल्द से जल्द राज्य केंद्र के पास जमा करवाने पर दें। जीन्द और कैथल ने जमा करवा दी है। गत सितंबर माह में सोनीपत शहर में स्थानीय साथियों की मदद से करीब 65000/- रूपये चन्दा इकट्ठा किए गया है जिसमें से 60000/- रूपये नकद प्राप्त हो चुके हैं। इसमें से अधिकतर राशि उतरी क्षेत्र के राज्यों की जोनल कार्यशाला में खर्च हो चुकी है।
3. विभिन्न जिलों की ओर सदस्यता, पुस्तकों, बुलेटिन और स्टेट कोटा आदि की बकाया देनदारी है जिसे जल्द राज्य केन्द्र के पास जमा कराने का निर्णय लिया गया है। जिसका विवरण निम्नलिखित है:
1) जीन्द ₹4500/-
2) कैथल ₹19000/-
3) करनाल ₹38500/-
4) हिसार ₹1500/-
5) भिवानी ₹4500/-़ (नोट: ₹1500/- जो रिटायर्ड कर्मचारी संघ की ओर बकाया हैं और वजीर सिंह जी द्वारा जमा कराया जाना है।)
(विशेष नोट : उक्त बकाया राशि में वर्ष 2025 की सदस्यता राशि शामिल नहीं है। साथ ही सभी जिले एक बार अपनी बकाया राशि का मिलान कर लें और कोई त्रुटि रह गई हो तो राज्य कोषाध्यक्ष को सूचित करने का कष्ट करें।)
3. वैज्ञानिक मानसिकता अभियान के दूसरे फेज के अंतर्गत *“वैज्ञानिक चेतना का विकास”* नामक पुस्तिका पर जिलों के विभिन्न स्कूलों में परीक्षा लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जबकि फतेहाबाद जिला नेतृत्व तो युवा संगठन डी.वाई.एफ.आई. और छात्र संगठन एस.एफ.आई. के साथ नेटवर्किंग कर संयुक्त प्रयास कर स्वतंत्र पहलकदमी करते हुए 18 स्कूलों के करीब 1350 छात्रों के एग्जाम लेकर अब दूसरे दौर की जिला स्तरीय परीक्षा लेने की तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में निर्णय लिया गया है कि सभी जिले अब इस परीक्षा को स्कूल स्तर पर 20 अक्तूबर यानि दिवाली तक पूरा करके एक नवम्बर तक 20 प्रतिशत छात्रों की जिला स्तरीय परीक्षा ले लिया जाए। इसके बाद महान वैज्ञानिक सी. वी. रमन-डे पर 7 नवम्बर को परीक्षा सभी जिलों में जिला स्तरीय कार्यक्रमों के आयोजन कर वैज्ञानिक मानसिकता पर वैचारिक विमर्श कर लिया जाए। जिसमें 20 प्रतिशत स्कूली छात्रों, अध्यापकों और जिला कमेटी सदस्यों एवं कार्यकर्ताओं को अवश्य शामिल कर लिया जाए।
4. स्टेट कृषि कोर समूह की पहलकदमी पर राज्य कार्यकारिणी में लिए गए निर्णयानुसार दिनांक 23-24 अगस्त को जाट धर्मशाला, हिसार में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें उम्मीद से भी ज्यादा साथी जिनमें पहले दिन करीब 100 और दूसरे दिन करीब 60 साथियों ने भाग लिया। जहर मुक्त खेती और जहर मुक्त थाली के कांसेप्ट को आगे बढ़ाने के लिए काफी अच्छा विचार-विमर्श किया गया। जींद और पानीपत में भी कृषि कार्य को लेकर अतिरिक्त प्रयास किए जाने की योजना बनी है।
5. संगठन के संविधान के ड्राफ्ट पर काफी साथियों ने बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। जिन्हें शामिल करते हुए ड्राफ्ट को पुनः समीक्षा कर आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद व्यापक विचार-विमर्श के साथ बदलाव हेतु आगामी राज्य सम्मेलन में पेश कर पारित करवाया जाएगा।
6. राज्य कार्यकारिणी में से बनाए गए 10 कोर समूहों में से कुछ कोर समूह आगे बढ़कर पहलकदमी कर रहे हैं लेकिन कुछ सक्रियता नहीं बना पा रहे हैं। जिनमें विज्ञान, युवा, बुलेटिन, कृषि कोर समूह सबसे ज्यादा सक्रिय हैं जबकि समता, सांस्कृतिक, कृषि और दलित कोर समूह ने पहलकदमी लेनी शुरू की है। लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, अल्पसख्यक आदि कोर समूहों की सक्रियता न हो पाने के चलते शिक्षा, स्वास्थ्य और साम्प्रदायिक सद्भावना जैसे मुद्दों पर ज्यादा विचार-विमर्श नहीं हो पा रहा है। समता, सांस्कृतिक और बुलेटिन कोर का विस्तार करने के लिए जिलों से दो-दो नाम जल्द से जल्द उपलब्ध करवाने हेतु आग्रह किया गया है। इनके अलावा सोशल मीडिया ग्रुप बनाकर उसे भी सक्रिय करना चाहिए। संभव हो तो इन ग्रुपोें में एक युवा व एक महिला के नाम दे दिए जाएं। साथ ही हर जिला अपनी जरूरत अनुसार राज्य कोर समूहों के साथियों को शामिल कर जिला स्तरीय कोर समूहों का गठन भी अवश्य करे।
7. गत 7 सितम्बर 2025 को चंद्रग्रहण लगा था जिसका आँखों देखा नजारा जींद, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, करनाल, गुरुग्राम, झज्जर, पानीपत, सोनीपत और रोहतक आदि जिलों के साथियों ने देखा। हिसार में तो मीडिया पर भी काफी प्रचार-प्रसार किया गया है।
8. हिसार में सदभावना मंच के साथ मिलकर बाढ़ राहत के लिए सामग्री जुटाई गई है। जीन्द में 6 अगस्त को स्कूली छात्रों के बीच गौहर रजा की युद्ध विरोधी डाक्युमैंटरी "एक खूबसूरत जहाज" दिखाकर पैंटिंग प्रतियोगिता का तथा शहीद भगत सिंह जयन्ती पर दो कार्यक्रमों के सफल आयोजन किए गए हैं। पानीपत में गोष्ठी करके युवाओं के साथ संवाद किया गया है।
*भावी योजना :*
1. वैज्ञानिक मानसिकता अभियान: इस अभियान के दूसरे चरण में स्कूलों में वितरित की गई पुस्तिका *"वैज्ञानिक चेतना का विकास"* पर सभी छात्रों की स्कूली स्तर की परीक्षा 19 अक्टूबर तक ले ली जाए। इनमें से टॉप आने वाले 20 प्रतिशत छात्रों की छंटाई करके जिला स्तर पर परीक्षा एक नवम्बर तक अवश्य ले ली जाए। फिर इन्हीं 20 प्रतिशत छात्रों के अलावा सहयोग करने वाले सभी अध्यापकों, समिति कार्यकर्ताओं व संगठनकर्ताओं एवं सहयोगी बुद्धिजीवियों आदि को शामिल कर प्रसिद्ध वैज्ञानिक सी.वी. रमन की जयन्ती पर 7 नवम्बर को वैचारिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लिया जाए। इसके बाद 30 नवंबर को जीन्द में राज्य स्तरीय कार्यक्रम करने की सहमति बनी है। जिसमें हर जिला में जिला स्तर पर परीक्षा देने वाले छात्रों में से 20 प्रतिशत छात्रों एवं अध्यापकों तथा एक्टीविस्टों को शामिल करके बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन हो। हम बाल विज्ञान कांग्रेस के विकल्प के रूप में भी मान सकते हैं और टॉपर छात्रों को बाल वैज्ञानिक का दर्जा भी दे सकते हैं।
2. सांगठनिक सम्मेलन एवं बजट : स्टेट कार्यकारिणी के निर्णय अनुसार आगामी राज्य स्तरीय सांगठनिक सम्मेलन को मार्च 2026 में करनाल में जिला कार्यकारिणी की सहमति के साथ करने का निर्णय लिया गया है। इस बार राज्य सम्मेलन 3 दिनों तक करने पर भी राय बनी है क्योंकि हमें अपने संगठन के संविधान को भी पारित कराना है। उक्त सम्मेलन को भारी उत्साह एवं व्यापक तैयारियों के साथ करने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलन पर करीब 3 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसके लिए पूर्व की तरह बजट जुटाने के लिए स्मारिका निकाली जाएगी। जिसके विज्ञापनों से होने वाली आय से 50 फीसदी हिस्सा स्टेट और 50 फीसदी जिला पर रहेगा। स्मारिका व चन्दा अभियान के जरिए राज्य भर में ₹10 लाख चन्दा जुटाने की सहमति बनी है। लेकिन राज्य सम्मेलन से पूर्व सभी जिले अपनी-अपनी वर्तमान सदस्यता के आधार पर गहन-विमर्श करते हुए 30 नवम्बर तक स्थानीय इकाईयों के सम्मेलन कर नई कमेटियों का गठन करेंगे। साथ ही दिसम्बर 2025 तक 10 जिला सम्मेलन कर कार्यकारिणी गठित करने का भी निर्णय लिया गया है। अब तक 4 जिलों जिनमें जीन्द में (10-11 जनवरी 2025), कैथल में (21 दिसम्बर), करनाल में (13 दिसम्बर) और पानीपत में (14 दिसम्बर) को जिला सम्मेलनों की तिथियां तय कर ली हैं। जबकि रोहतक, भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, गुरूग्राम और सोनीपत में भी जल्द सम्मेलनों की तिथियां तय करके कमेटियों का विधिवत चुनाव करवा लिया जाएगा। जिनमें हर स्तर पर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पर सहमति बनाई गई है। साथ ही इनकी वार्षिक योजना बनाने, ज्ञान-विज्ञान बुलेटिन के स्थाई सदस्य बनाने और बजट बनाकर चन्दा अभियान चलाने पर सहमति बनी है।
3. सभी कोर समूहों के संयोजकों से अनुुरोध किया गया है कि खुद पहलकदमी लेकर सक्रियता बढ़ाएं ताकि पूरे संगठन को सभी मुद्दों पर व्यापक विमर्श में शामिल किया जा सके। अन्य सक्रिय कोर समूहों की तरह विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य, अल्पसख्यक कोर की सक्रियता बढ़ाई जाए; जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सांप्रदायिक सद्भावना जैसे मुद्दों पर भी ज्यादा विचार-विमर्श हो सके। इसी प्रकार सभी जिला प्रभारी भी जिलों से तालमेल करके हर तरह से मार्गदर्शन करते हुए मदद करें। कृषि कोर समूह की पहलकदमी एवं जिला कमेटी के तत्वावधान में आगामी 18 अक्तूबर को जीन्द में कृषि कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
4. जन स्वास्थ्य अभियान की राज्य स्तरीय कन्वेंशन आगामी 23 नवम्बर 2025 को करने का निर्णय लिया गया है। जिसके आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति की लगी है। जबकि अन्य संगठन भी सहयोग करेंगे। जल्द ही राज्य कार्यकारिणी की मीटिंग करके वैन्यू कर लिया जाएगा।
5. अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क (AIPSN) द्वारा तय फार्मूले अनुसार आगामी दिनांक 25 से 27 अक्तूबर 2025 को भोपाल में आयोजित की जा रही राष्ट्रीय ब्रेन स्टोर्मिंग कार्यशाला में भ्ळटै की ओर से डाॅ. रणबीर दहिया, प्रमोद गौरी, नरेश प्रेरणा, सोहन दास, सुरेश कुमार, मनीषा (महिला) और विक्रम अली (युवा) जाएंगे। इस कार्यशाला में HVM और BGVS के नेतृत्वकारी साथी भी जाएंगे।
*प्रस्तुति :*
सुरेश कुमार, राज्य सचिव।
दिनांक: 14 अक्तूबर 2025
Monday, October 13, 2025
some thoughts
Some thoughts
It is our duty to train and develop our mind and acquire knowledge, as much as we possible can obtain. Knowledge is like a deep well, fed by peremial springs, and our mind is the little bucket that we drop in to it, we will get as much as we can assimilate.
The brain, which is aeous physical organ ofthe mind, is one of the two precius products of the aeous of Evolution: the other is the inponderable "social instinct". This wonderful brain, whore every convolution represents millions of years of time, really distinguishes us from the animals. Many animals have very powerful sense organs: the eagle, the ant and the dog have keener sense that man. But no animal has a more evolved brain and a higher inte linence. If we donot develop and use this brain to the utmost of our power, we are more akin to the heasts than to Homosapiens.
more akin to the heasts than to Homosapiens.
Knowledge and mental self culture will confer told blessings upon us . We will not be victims of superstition and demagogy in religion and politics. We will know our duty and do it. To be wise and independent in our religion and in our politics, not to be deped and duped by the selfish priests and the schening politicions of capitalism and socalled socialism: is this not a noble aim worth striving for? Most men and women today are not free and wise. They are like kites flown by the priests and politicians who hold the strings. They are fleeced and fooled on account of this ignorance of science, History, Economics and other subject. Half the ills of Mankind are due to Ignorance, the other half arise from Egotism. Knowledge is fully as important as Ethics: they are really inter-de endant As Lessing says: "The aim of knowledge is Truth, and truth is a need of the soul". The pessian poet Saadi exhorts all to acquire knowledge wit unremmitting zeali:" Like a taper, one should melt in pursuit of knowledge. This is they duty, even if the has to travel over the whole earth".
In the never ending struggle for knowledge, we should work regularly and methodically. We should devote a certain portion of our time daily to study or experiment. We feed the body several times a day: We should not starve our Mind. We should keep a diary, in which we should note the titles of new books. We should get new and second hand catalognes from the book sellers. We should always be in hunt for cheap second hand books in the shops. We should have our own private liabrary, however small. We should take pride in the books that adorn our home. With every book we buy, we add a nullimeter to our mental stature. We should borrow books from public liabraries and also from our friends. Also we should not forget to return then unctually. We should keep notes and summaries of what we read other wise our studies will be like a ranifall on a sloping roof.
We should Revise much and refresh our memory frequently: like Macaulay should have all our knowledge instantly available. We should know exactly what we know, as we know how much money we have at the Bank and as a house wife we know that is available in the Kitchen. We should make plan for our studies a few years in advance, as the states man plan an economic or military Campaign. We should set apart a fixed proportion of our in come for the purchase of books and journals: Call it the "book fund" and should not it for any other purpose. Thus we will find it easy spend money on books. We should Join scientific and literacy societies and study circles; we should not grudge the small subscriptions. It is a good plan to form a small group, in which each member read a new book and then offers a paper on it, with
copious quotations from the original. Such "Cooperative study" is necessary, as our spare time is unfortunately limited. Life itself is short, for too short for the lover of knowledge. It we had the gift of immortality like Jithonus, and also unfading youth, then we would surely devote a hundred years to the study of Astronomy, a hundred years to Biology, a hundred years to History and so on, untill we could call ourselves a well educated man or woman. But alas! our life is reck oned in months and years, not in centuries and milennia. We are old before we have discovered that we know very little independ We should make haste to learn. J.R. Green, the famous historian wrote: "I know what men will say of me, "He died learning;" Let the men say the same of us, Two outrstaches and obstructions are there to mental self culture. We should try to over come these with concious efforts.
1. Many of us are so money mineded that we donot under take any serious work that does not pay. It is belived that it is foolish to exert them selves for such study and brani work as cannot be converted in to cash. Hard work for money and then planty of play & pleasure; this seems to be their rule of life. For them intellect is only the key to material prosperity; and personal mental development is a foolish fad. Rich and poor all suffer from it. Intellect should be employed chiefly as an instrument of growth and social service. must not be a tool for exploiting our fellow citizens, If we look upon all brain work as a money making device, we are a degraded and pitiable prestitute. Such prostitution is so rampant in our capitalist world that we take it as a matter of course. We are not replled by it or astonished at it. Nature has given as a brain to know, to think, to understand, to reflect, to discover, to invent, and to fell the
deep joy that comes to all who fulfill Nature's law. So we must not be ours own worth enemies.
2. Certain false theories and dogrnas have diverted millions of men and women from the pursuit of intellectual culture and persuaded them even to take pride in their ignorance and stupidity.
This may seem strange and in credible, but it is only too true. We should not allow our in mind to be enslaved by many unsound theories of life which would convert the best men and women into virtuous and holy animals. Ignorance in brutesh, knowledge is a peculiarly human prerogative. This knowledge can be had in various waye but books are the main saurce. For this purpäse one has to learn to read & write. Also it Jan Vachan Andolan is to be build in to Jan Vachna Andolan then the activists will have to first inculcate the above mentioned qualities in them only their the conducing environment for liabraries can be built.
Friday, October 10, 2025
ची ग्वेरा
दुनिया के क्रांतिकारियों के महान नायक समाजवादी डॉक्टर अर्नेस्टो चे ग्वैरा
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,,,,,मुनेश त्यागी
अंतर्राष्ट्रीय क्रांतिकारी समाजवादी चे ग्वेरा ने कहा था कि पूरी दुनिया ही क्रांतिकारियों की कार्यशाला है। वे किसी देश, शहर या राज्य तक सीमित नहीं रह सकते। दुनिया में जहां कहीं भी शोषण, अन्याय, जुल्म और युद्ध हो रहे हैं, वे वहां जाकर उनके खात्में का संघर्ष छेड़ें। आज 9 अक्टूबर 1967 दुनिया के महान अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी कॉमरेड चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है जो बोलीविया में क्रांति करते हुए वहां के जंगलों में सीआईए और बोलीविया की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
चे ग्वैरा एक अर्जेंटाइनी क्रांतिकारी डॉक्टर थे जिन्होंने पूरी दक्षिणी अमरीका का मोटरसाइकिल से दौरा किया था और क्रांति की तलाश करते करते मेक्सिको पहुंच गए थे और वहां उन्होंने गरीब बस्ती में जाकर कोढ़ी मरीजों का इलाज करना शुरू किया। वहीं पर उनकी मुलाकात क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो से हुई और यहीं से चे ग्वैरा फिदेल कास्त्रो के दल के साथ, क्युबा में सशस्त्र क्रांति करने के लिए, उनके साथ आ गए और क्यूबा में तानाशाह बतिस्ता के शोषणकारी शासन का अंत करके, क्यूबा में सशस्त्र क्रांति की और किसानों मजदूरों का राज्य कायम किया। चे गुएवारा क्यूबा मिशन में एक डॉक्टर के रूप में भर्ती किए गए थे, मगर जब वहां लड़ाकू क्रांतिकारियों की कमी हुई तो उन्होंने दवाई का झोला छोड़कर, बंदूक हाथ में थाम ली और क्यूबा के फिदेल कास्त्रो और उनके साथियों के साथ मिलकर सशस्त्र क्रांति की, शस्त्र का विरोध शस्त्र से किया और किसान और मजदूरों का राज्य कायम किया और क्यूबा में समाजवादी समाज की स्थापना की।
चे गुवेरा एक डॉक्टर थे। क्यूबा के लोगों ने उन्हें प्यार और सम्मान से "चे" की उपाधि से नवाजा। चे का अर्थ है,,, सम्मानीय, सर, महाशय। उसके बाद वे सारी दुनिया में "चे" के नाम से प्रसिद्ध हो गए और आज भी लोग उन्हें चे के नाम से ही जानते हैं। उनकी महानता इस बात से सिद्ध हुई थी कि वे दुनिया के सारे लड़ाकू क्रांतिकारियों को अपना भाई समझते थे और कहां करते थे कि दुनिया में जहां कहीं भी अन्याय और शोषण हो, वहां उनका मुकाबला और उनका खात्मा किया जाए।
क्यूबा में चे ग्वैरा ने क्यूबन क्रांतिकारियों के साथ मिलकर सफल क्रांति की, किसानों मजदूरों का राज्य कायम किया, किसान मजदूरों की सत्ता और सरकार कायम की और वहां की सारी जनता को शिक्षा, काम, इलाज, मकान, रोजगार, सुरक्षा जैसी बुनियादी मोहिया करायी और तमाम तरह के शोषण, अन्याय, गैर बराबरी, भेदभाव का खात्मा किया और एक समाजवादी समाज का निर्माण किया ।
अमर क्रांतिवीर चे ग्वैरा का मानना था कि जिस आदमी के दिलो-दिमाग में अन्याय, शोषण, गुलामी, असमानता, भेदभाव और जुल्मों सितम के खिलाफ गुस्सा नहीं आता, उनको देखकर वह परेशान नहीं होता, तो वह एक सच्चा क्रांतिकारी, एक सच्चा मार्क्सवादी लेनिनवादी नहीं हो सकता और जिसे इन्हें देख कर गुस्सा आता है, वह मेरा असली कॉमरेड है, असली क्रांतिकारी है।
उनका कहना था कि क्रांति एक संगठित प्रयास है। यह मजदूरों और किसानों की एकता और एकजुट संघर्ष के बिना नहीं हो सकती। उनका कहना था कि "क्रांति एक ऐसा फल नहीं है जो खुद ब खुद जमीन पर आ गिरता हो, इस फल को जमीन पर गिराने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।" उन्होंने आगे कहा कि "मैं कोई मुक्तिदाता नहीं हूं, मुक्तिदाता नहीं होते हैं, जनता स्वयं ही अपने को मुक्त करती है और जनता ही सबसे बड़ी मुक्तिदाता होती है।"
जब बोलीविया के जंगलों में क्रांति के लिए लड़ते हुए चे गुएवारा को गिरफ्तार कर लिया गया तो साम्राज्यवादी एजेंटों द्वारा गोली मारे जाने से पहले कामरेड चे ग्वेरा ने कहा था कि "तुम मेरे शरीर को तो मार सकते हो लेकिन तुम मेरे विचारों को नहीं मार सकते।" आज यह बात शत प्रतिशत सही है कि कामरेड चे ग्वेरा हमारे बीच में नहीं है, उनके शरीर का अंत कर दिया गया है, मगर उनके विचार पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। पूरी दुनिया के लोग मजदूर, किसान, क्रांतिकारी नौजवान और छात्र उनको याद करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं और क्रांति के अभियान में शामिल हैं और क्रांति की प्रक्रिया को, उसके मार्ग को, लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और क्रांति की लौ को जलाये हुए हैं।
क्यूबा की सरकार में, वे कई पदों पर मंत्री रहे। उन्होंने सारी दुनिया का दौरा किया, हिंदुस्तान का भी दौरा किया और उसके बाद कांगो में चले गए जहां उन्होंने क्रांतिकारी लड़ाई में भाग लिया और वहां के लड़ाकूओं को गुरिल्ला वारफेयर की जानकारी दी। इसके बाद एक सोची-समझी रणनीति के तहत चे ग्वैरा क्रांति करने के लिए बोलिविया में चले गए, जहां उन्होंने एक गुरिल्ला सेना का निर्माण किया और इतिहासकार कहते हैं अगर कुछ किसान गद्दारी ना करते और उनके कुछ अपने ही साथी, उनका विरोध ना करते तो उन्होंने वहां पर भी क्रांति सफल कर दी थी।
मगर अफसोस, चे ग्वैरा बोलीविया में क्रांति के लिए लड़ते लड़ते शहीद हो गए और कुछ अपने ही साथियों की मुखबिरी के करण, वहां पर क्रांति सफल होते-होते रह गई। आज उन्हीं अमर शहीद महान क्रांतिकारी कामरेड अर्नेस्टो चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है। यह बहुत खुशी की बात है कि चे ग्वैरा के चले जाने के बाद वहां की जनता ने क्रांति के अभियान को बंद नहीं किया। वहां के क्रांतिकारी नेतृत्व ने धीरे-धीरे अपनी गलतियों से सीखा, उन्हें सुधारा और उसके बाद बोलीविया में क्रांति कर दी। आज वहां किसानों मजदूरों की क्रांतिकारी सरकार जनता के कल्याण के कार्य कर रही है।
दोस्तों, आइए हम उनकी याद में क्रांति के कारवां को, समाजवादी समाज व्यवस्था के अभियान को, विचारों को, आगे बढ़ाएं और उनके चाहे समाज की स्थापना करें और भारत में एक ऐसा समाज कायम करें जिसमें सबको आधुनिक, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले, सबको आधुनिक और मुफ्त इलाज मिले, सबको काम मिले, सबको घर मिले, सबको रोटी, कपड़ा और सुरक्षा मिले, जहां पर किसी का शोषण ना हो, किसी के साथ अन्याय ना हो, किसी के साथ जुल्म ना हो, किसी के भी साथ ज्यादती ना हो और पूरे समाज में समता, समानता और भाईचारे का साम्राज्य कायम हो।
चे ग्वेरा एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे कि जहां धर्म, जाति, भाषा, वर्ण, क्षेत्र और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव ना हो, आदमी और औरत के साथ बराबरी का बर्ताव किया जाए, जहां औरतों को भोग्या और मनोरंजन की वस्तु न समझा जाए, सेक्स की वस्तु ना समझी जाए और उसके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाए और उन सबको पढ़ने, लिखने, रोजगार और अपना संपूर्ण विकास करने का मौका दिया जाए।
महान क्रांतिकारी कामरेड चे ग्वैरा एक ऐसे ही अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी थे। उनका मानना था कि दुनिया में जहां कहीं भी जुल्म ज्यादती, अत्याचार, शोषण और अन्याय हो रहा हो, उसका वहां विरोध किया जाए और वहां के लोगों के साथ मिलकर, उस जनविरोधी व्यवस्था का खात्मा करके, उसके स्थान पर एक समाजवादी व्यवस्था वाली समाज की स्थापना करनी चाहिए। उनके विचारों की मुहिम को आगे बढ़ाया जाए। उनके लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कॉमरेड चे ग्वेरा आज भी दुनिया के हीरो बने हुए हैं। सबसे ज्यादा नौजवान उन्हीं की छपी हुई कैंप और टी शर्ट पहनते हैं। वे समाजवाद के अमर सेनानी है, क्रांति के अमिट वाहक हैं। जब तक यह दुनिया रहेगी, जब तक यह प्रकृति रहेगी, तब तक दुनिया के महान क्रांतिकारी डॉ चे ग्वैरा का नाम अमर रहेगा।
इंकलाब जिंदाबाद,
समाजवाद जिंदाबाद,
क्रांतिकारी चे ग्वैरा जिंदाबाद,
क्रांतिकारी अंतर्राष्ट्रीयतावाद जिंदाबाद।
दक्षिणी अमेरिका में अपनी मोटरसाइकिल पर घूमते हुए उन्होंने वहां की जनता के साथ, वहां के पूंजीवादी शासकों द्वारा किए जा रहे शोषण, अन्याय, जुल्म और गैर बराबरी के दर्शन किए थे और उनको अपनी आंखों से देखा था और उन्होंने कई देशों में वहां की सरकारों के साथ मिलकर, इस लुटेरे और अमानवीय पूंजीवादी निजाम का खात्मा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि "दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी "पूंजीवाद" है। जब तक यह पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था खत्म करके, इसके स्थान पर समाजवादी व्यवस्था कायम नहीं कर दी जाती, तब तक जनता को उसके बुनियादी अधिकार नहीं मिलेंगे।"
आज के परिवेश में हम देख रहे हैं कि आज भी दुनिया के लुटेरे पूंजीवादी साम्राजवादी देश, पूरी दुनिया में तबाही मचाये हुए हैं, पूरी दुनिया को लूटकर, पूरी दुनिया का शोषण करके, जुल्म करके, युद्ध करके, उसके साथ अन्याय करके, अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और पूरी दुनिया पर अपना कब्जा और प्रभुत्व कायम करना चाहते हैं। नैटो और अमेरिका आज इसी अभियान में लगे हुए हैं और पूरी दुनिया से समाजवादी व्यवस्था और सोच को खत्म करने पर तुले हुए हैं। सच में चे ग्वेरा ने कितने मार्के की बात कही थी कि "पूंजीवादी साम्राज्यवाद ही सारी दुनिया की बीमारियों की जड़ है और समाजवादी समाज और संस्कृति ही सारी दुनिया की बीमारियों की असली और सबसे कारगर दवा है।" महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा की वह बात आज भी उतनी ही सही साबित हो रही है।
Wednesday, October 8, 2025
डॉ सुब्बाराम
डॉ सुब्बाराम एक प्रख्यात फिजिसिस्ट महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी के। आज हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने अपना काम प्रतिबद्धता के साथ विज्ञान कम्युनिकेशन के क्षेत्र में किया। ( साइंस कम्युनिकेशन ). उन्होंने आकाशवाणी रोहतक पर विज्ञान के कई पक्षों पर - ऑस्ट्रनॉमी आदि पर बातचीत रखी। 1989 में एक किताब साइंस एंड साइंसिबिलिटी, compiled and edited by डॉ सुब्बाराम मंथन प्रकाशन ने प्रकाशित की। दूसरी किताब फिलासफी ऑफ साइंस 1998 में हरियाणा विज्ञान मंच के द्वारा प्रकाशित की गई।
मैंन स्ट्रीम और सेकुलर डेमोक्रेसी में छपे लेख 1981..1982 के दौर में ।
1985..1986,1986..1987.. में डॉ सुब्बाराम एमडीयू टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान रहे।
1688..1989 में उन्होंने वहां से रुकसत ले ली थी।
बतौर रिसर्चर उनके लेख कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जनरल में छपे। बेटे कार्तिक को रेगुलर मोड ऑफ स्टडी से हटा कर अपने आप पढ़ने को प्रोत्साहित किया।
जन्म सन 1942 आंध्रप्रदेश । प्राथमिक शिक्षा वहीं से।
बीएससी और एमएससी की डिग्री वाराणसी हिन्दू यूनिवर्सिटी से प्राप्त की।
पीएचडी की डिग्री इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर से की।
5साल आयरलैंड और कनाडा में बिताए रिसर्च
फैलोशिप के माध्यम से।
एक दशक तक एमडीयू के फिजिक्स विभाग में फिजिक्स के टीचर रहे।
क्रिएटिव लिटरेरी टेलेंट:-
दो किताब उनकी कविताओं की और एक metaphysical monologue in fictional form किताब छपी।
कविताएं कई जगह छपी।
कई लिटरेरी संस्थाओं के सदस्य रहे।
Deeply intersted in :
Social Sciences
Scientific Temper
Science and Technology
Education
कई लेख लिखे और कई जगह छपे और 4 किताबें
American Biological Institute included his name in their Year Book of Honour
Awarded a plaque for distinguished services to Science and Humanity.
International Biographical Centre ,Cambridge, U.K. awarded him a certificate of Merit.
State Resource Centre Haryana से भी जुड़े रहे , फिर हैदराबाद चले गए।
Man of his own and his values of life .
हैदराबाद में कुछ काम शुरू किया मगर कामयाब नहीं रहे। फिर घर पर ही अकादमिक काम में जुटे रहे।
Wednesday, September 3, 2025
ग्रहण
ग्रहण 7 सितंबर को रात 8.58 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर, 2025 को सुबह 2.25 बजे समाप्त होगा। यह एक "ब्लड मून" "कॉपर मून" होगा क्योंकि पूर्ण ग्रहण चरण के दौरान चंद्रमा लाल हो जाता है। अधिकतम ग्रहण, या पूर्णता तब पहुंचेगी जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के केंद्र के सबसे करीब होगा, 7 सितंबर को रात 11:41 बजे होगा। हालांकि समग्रता शुरू होगी 7 तारीख की रात 11.00 बजे और 8 सितंबर 2025 की रात 12.22 बजे समाप्त होगा। ग्रहण 8 सितंबर 2025 की सुबह 2.25 बजे तक पूरा हो जाएगा।
नीचे अधिक विस्तृत विवरण दिया गया है:
उपच्छाया ग्रहण प्रारंभ: 7 सितंबर को रात्रि 8:58 बजे।
संपूर्णता प्रारंभ: 7 सितंबर को रात्रि 11:00 बजे।
अधिकतम ग्रहण: 7 सितंबर को रात 11:41 बजे (पृथ्वी की छाया के केंद्र के सबसे करीब)।
समग्रता समाप्त: 8 सितंबर को प्रातः 00:22 बजे।
उपच्छाया ग्रहण समाप्त: 8 सितंबर को प्रातः 2:25 बजे।
अवधि: 5 घंटे 27 मिनट
यह पूर्ण चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा
चंद्र ग्रहण पूर्णिमा चरण में होता है। जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के ठीक बीच में स्थित होती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा की सतह धुंधली हो जाती है और कभी-कभी कुछ घंटों के दौरान चंद्रमा की सतह एकदम लाल हो जाती है। प्रत्येक चंद्र ग्रहण पृथ्वी के आधे भाग से दिखाई देता है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की छाया के आंतरिक भाग या उपछाया में चला जाता है। पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हुए सूर्य के प्रकाश का कुछ भाग चंद्रमा की सतह तक पहुँचता है, जिससे वह मंद प्रकाश में आ जाता है। कम तरंग दैर्ध्य वाले रंग - नीला और बैंगनी - लाल और नारंगी जैसे लंबी तरंग दैर्ध्य वाले रंगों की तुलना में अधिक आसानी से बिखरते हैं। क्योंकि ये लंबी तरंग दैर्ध्य पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती हैं, और छोटी तरंग दैर्ध्य दूर बिखर जाती हैं, चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा नारंगी या लाल रंग का दिखाई देता है। ग्रहण के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में जितनी अधिक धूल या बादल होंगे, चंद्रमा उतना ही अधिक लाल दिखाई देगा।
इन सभी को ध्यान में रखते हुए, चूंकि यह भारत में दिखाई देने वाला आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण है, इसलिए रूढ़िवादी ताकतें छद्म वैज्ञानिक विचारों का प्रचार करने और विश्वासियों के बीच अंधविश्वास पैदा करने की कोशिश करेंगी। एक विज्ञान कार्यकर्ता के रूप में हमारा कर्तव्य होगा
जैसा कि ऊपर बताया गया है चन्द्र ग्रहण का उचित विज्ञान प्रचारित करें।
चूंकि पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में दिखाई देगा, और चूंकि 1 सितंबर को आमतौर पर विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है, 7 सितंबर को भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ शांति और एकजुटता के प्रतीक के रूप में मनाया जा सकता है।
लोगों को ग्रहण के विज्ञान के बारे में जागरूक करने और ग्रहण से जुड़े ज्योतिषीय और धार्मिक अंध विश्वासों का खंडन करने के लिए यथासंभव अधिक से अधिक ग्रहण अवलोकन शिविरों की व्यवस्था करें।
चाय, बिस्कुट और चर्चा के साथ ग्रहण का आनंद लें (अड्डा या चांदनी चाय पार्टी)
लोगों को घटना के बारे में पहले से ही पत्रक और माइक्रोफोन अभियान के माध्यम से जागरूक करें ताकि वे खुद को बुरी ताकतों के हाथों से दूर रख सकें।
अपने शिविरों में पोस्टर प्रदर्शनी, चंद्रमा के दूरबीन और दूरबीन से देखने की व्यवस्था करें, ग्रहण पर रोल प्ले करें और समग्रता के दौरान ब्लड मून या कॉपर मून होने का उचित कारण बताएं।
2025 के आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण के किसी भी पूर्वकल्पित बुरे प्रभाव के बारे में लोगों को सतर्क करें। इसे किसी भी अनुष्ठान का पालन किए बिना एक सामान्य दिन की तरह चलने दें।
अस्पष्ट विचारों को नष्ट करें. वैज्ञानिक सोच फैलाएं.
Monday, September 1, 2025
शहीद
सन 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने वाले रोहतक के शहीदों की सूची--
साथी राजेन्द्र हुड्डा
(यह संपूर्ण सूची नहीं है । अभी और भी नाम खोजे जाने बाकी हैं । यहां केवल 1857 के कुछ ही शहीदों की सूची दी गई है।)
क्रमांक स्थान नाम सजा
1. रोहतक मुप्पी दुल्ला खां फांसी
2. रोहतक जागू(रांघड़) फांसी
3. रोहतक गुलाम हुसैन फांसी
4. रोहतक लाहिया फांसी
5. रोहतक रहमत अली फांसी
6. रोहतक महमूद फांसी
7. रोहतक जसना फांसी
8. रोहतक वुधू(बुद्धू) फांसी
9. रोहतक मुज्जहर अली फांसी
10. रोहतक गुल्लाहा फांसी
11. रोहतक प्यारा फांसी
12. रोहतक हैदर शेख फांसी
13. रोहतक अलिबख्श शेख फांसी
14. रोहतक साबरअली शेख फांसी
15. रोहतक खुदाबख्श अली फांसी
16. रोहतक तोरीबख्श खान फांसी
17. रोहतक शाहबाज खान फांसी
18. रोहतक अमानत खान फांसी
19. रोहतक खिलयन सिंह फांसी
20. रोहतक मातादीन फांसी
21. रोहतक भीक सिंह फांसी
22. रोहतक पूर्ण सिंह फांसी
Sunday, August 31, 2025
plot
Information for record: -Plot Azad garh Re measured at site on 24 Aug 25 in presence of sh Parmod ji, shsatbir nagal, labh singh Hooda and sh sandeep singh.Hvm/Hgvs plot size 46'-7"×60'and Ram niwas plot 20'-1"×60' . please note down for record .
Thursday, August 28, 2025
आर्टिकल्स
[28/8, 5:24 pm] Sabka Haryana: एआईपीएसएन ईसी को पर्यावरण डेस्क रिपोर्ट: 13-14 जुलाई 2025
जलवायु प्रभावों पर चल रहा अखिल भारतीय अभियान जैसा कि चुनाव आयोग अच्छी तरह से जानता है, सितंबर/अक्टूबर 2024 से शुरू होकर, एआईपीएसएन ने हीट वेव्स और अत्यधिक वर्षा और संबंधित भूस्खलन, बाढ़ और शहरी बाढ़ पर ध्यान देने के साथ जलवायु प्रभावों पर एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था। उत्तर, दक्षिण और उत्तर-पूर्व में अभिविन्यास और क्षमता निर्माण के लिए क्षेत्रीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला के बाद दिसंबर 2024 के अंत में कोलकाता में 18वीं कांग्रेस में 4 उत्कृष्ट संसाधन व्यक्तियों और 2 केंद्रित कार्यशालाओं के नेतृत्व में एक पूर्ण बैठक में चर्चा हुई। कुछ और लक्षित तैयारी कार्यों के बाद, वास्तविक अभियान केरल में मार्च के अंत में अत्यधिक गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ शुरू हुआ। तब से अभियान ने पूरे देश को कवर कर लिया है, हालांकि राज्यों में उपलब्धि के विभिन्न स्तर हैं।
कुछ मध्यवर्ती समीक्षाओं के बाद, 6 जुलाई 2025 को नवीनतम ऑनलाइन डेस्क समीक्षा में असम, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, ओडिशा, एपी, तमिलनाडु, पांडिचेरी और केरल द्वारा रिपोर्टिंग सुनी गई। विवरण यहां नहीं दिया गया है, क्योंकि रिपोर्टें स्वयं अधूरी थीं या उनमें थोड़ी-थोड़ी जानकारी थी। असम ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि नमी के साथ उच्च गर्मी का मौसम सितंबर तक जारी रहेगा, और दिल्ली भी इसी तरह की स्थितियों के कारण अपनी गतिविधियां जारी रख रही है, जो हालांकि कम हो रही हैं। अन्य सभी राज्यों ने इस वर्ष के लिए अपना अभियान कार्य पूरा कर लिया है।
इस बात पर सहमति हुई कि सभी राज्य/संगठन अपनी गतिविधियों, राज्य ताप कार्य योजनाओं के अध्ययन के परिणाम, अन्य हितधारकों विशेष रूप से कमजोर वर्गों की भागीदारी, राज्य/स्थानीय सरकार के साथ बातचीत और जुड़ाव के परिणामों, जमीनी स्तर पर की गई कार्रवाइयों और समग्र परिणामों की एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करेंगे। डेस्क संयोजक ऐसी रिपोर्टों के लिए एक प्रारूप तैयार करेंगे।
इसका उद्देश्य यथासंभव संपूर्ण और कठोर अखिल भारतीय रिपोर्ट तैयार करना होगा। इसे अद्यतन किया जा सकता है और अगले वर्ष हमारी गतिविधियों में सुधार हो सकता है।
अभियान का अगला प्रमुख तत्व अत्यधिक वर्षा है और इसके परिणाम हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुड़गांव, दिल्ली में पहले से ही महसूस होने लगे हैं। अभियान प्रभावित राज्यों में व्यवस्थित जानकारी एकत्र करना, विश्लेषण और हस्तक्षेप शुरू करेगा।
चूंकि सभी राज्य/संगठन पूरी तरह से जलवायु प्रभाव अभियानों में व्यस्त थे, इसलिए भविष्य की किसी योजना पर चर्चा नहीं की गई। हालाँकि, विशिष्ट या स्थानीय मुद्दे उठने पर उन्हें उठाया जाएगा। निकोबार ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल और टाउनशिप इसका एक उदाहरण है। इसी तरह वन अधिकार कानून को लेकर वन विभाग और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच भी टकराव है।
डेस्क समीक्षा के दौरान डेस्क पुनर्गठन पर विचार नहीं किया गया।
[28/8, 5:34 pm] Sabka Haryana: एआईपीएससी में किए गए सदस्यों के साथ परामर्श और उत्तरी क्षेत्र, पूर्वोत्तर क्षेत्र, पूर्वी क्षेत्र, मध्य-पश्चिम और दक्षिणी क्षेत्र में कृषि और ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के संबंध में एआईपीएसएन के काम को सुविधाजनक बनाने की जिम्मेदारी लेने वाले डेस्क सदस्यों की बाद की ऑनलाइन/टेलीफोनिक बैठकें सुझाव देती हैं।
पीएसएम एजेंडे के रूप में कृषि, ग्रामीण प्रौद्योगिकियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जोनल टीमों द्वारा पहचाने जाने वाले स्थलों पर स्थायी कृषि प्रथाओं और प्रणालियों (एसएपीएस) के अवलोकन के लिए वास्तविक दुनिया के प्रयोगों के साथ शुरुआत करने के लिए डेस्क को सदस्यों को जोड़ना होगा। जोनल टीमें बनाने में राज्यों द्वारा एआईकेएस और एआईएडब्ल्यूयू, खाद्य आंदोलन नेटवर्क के सदस्यों और किसान मजदूर आयोग (केएमसी) के साथ सक्रिय किसानों और ग्रामीण श्रमिकों के संगठनों को जुलाई महीने के भीतर जोनल कार्यशालाओं के लिए जारी किए जाने वाले आमंत्रणों पर काम किया जाएगा।
डेस्क को अगले छह महीने की अवधि के दौरान प्रस्तावित जोनल इन-पर्सन कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहिए ताकि दो गुना एजेंडे पर सहयोगात्मक कार्य शुरू किया जा सके, अर्थात् कृषि में कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रवेश का अध्ययन और लगभग बीस (20) साइटों पर एसएपीएस पर वास्तविक दुनिया के प्रयोगों की शुरुआत, प्रत्येक राज्य 2025 में न्यूनतम एक साइट पर शुरुआत करेगा और 2027 तक 3-5 साइटों तक बढ़ाया जाएगा)।
कि डेस्क अगस्त की शुरुआत में "परिवर्तनकारी कृषि पारिस्थितिकी पहल" पर तैयारी के तहत एक चर्चा पत्र पर एक ऑनलाइन बैठक में विचार करने के लिए बैठक करेगी। डेस्क के सदस्यों को चर्चा के लिए संबंधित संसाधन सामग्री भी उपलब्ध हो जाएगी। जुलाई के अंत तक कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के संबंध में अपने क्षेत्र स्तर के हस्तक्षेप की योजना बनाने के लिए पीएसएम द्वारा आवश्यक परिप्रेक्ष्य, दिशानिर्देश और उपकरण विकसित करने का विचार है। 20 स्थानों पर पायलटों के साथ शुरुआत करने के लिए भोपाल में सितंबर/अक्टूबर महीने के दौरान एक व्यक्तिगत कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव किया गया है।
डेस्क 17 अप्रैल को एआईपीएसएन, एनएफएफ जीन अभियान और प्लांट प्रोटेक्शन इंस्टीट्यूट, डीडीएस, सीएसए द्वारा सामुदायिक बीज बैंकों, बीज उद्योग, जर्मप्लाज्म संरक्षण और जीएम बीजों पर हैदराबाद में आयोजित बैठक की सिफारिशों पर अमल करेगा, विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में एक बैठक अक्टूबर महीने के लिए योजना बनाई जा रही है।
यह डेस्क एफपीओ और सहकारी समितियों पर मंडी में एसटीडी और एचजीवीएस के साथ सह-मेजबान के रूप में आयोजित होने वाली बैठक और हिमालयी कृषि के मुद्दों पर काम करने वाले संबंधित व्यक्तियों को लाने के लिए देहरादून में एक बैठक का अनुसरण करेगा।
यह डेस्क TISS गुवाहाटी के परिसर में आयोजित करने की संभावना की खोज करके पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि पारिस्थितिकी पर AIPSN-FGS सहयोग का अनुसरण करेगा (जोरहाट में IFS में नागालैंड के किसानों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था)
कृषि और संबद्ध क्षेत्र पर चर्चा करने और दक्षिण क्षेत्र के लिए उपयुक्त भविष्य की कार्ययोजना बनाने के लिए तमिलनाडु में अगस्त/सितंबर में एक दक्षिण क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कृषि पारिस्थितिकी के लिए एक एजेंडा के कार्यान्वयन के लिए एक कृषि विनिमय कार्यक्रम भी हमारे विचारों में है।
कृषि और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जलवायु पर हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाने और जहर मुक्त थाली और जहर मुक्त मिट्टी और पानी पर एक वास्तविक दुनिया का प्रयोग शुरू करने के लिए अगस्त के महीने में हरियाणा के हिसार में आईएफएस और कृषि पारिस्थितिकी पर एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
[28/8, 5:48 pm] Sabka Haryana: मानव संसाधन शिक्षा पर ईसी मिनट:
एनईपी नामांकन के पांच साल - 2-3% वृद्धि - 2035 तक 50% वृद्धि का लक्ष्य -
काफी समस्याग्रस्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम - 2500 विश्वविद्यालयों की आवश्यकता - सरकार तैयार नहीं - कोई नई सरकार नहीं - 100 निजी - कार्यान्वयन करने वाले राज्यों को धन नहीं मिल रहा - कार्यान्वयन नहीं करने वाले भी पीड़ित हैं - गुणवत्ता खराब हो गई है - एक विषय का गहन ज्ञान संभव नहीं है - यहां तक कि केंद्रीय विश्वविद्यालय भी सुसज्जित नहीं हैं - आईकेएस प्राथमिकता है - हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है - आईआईटी ऐसे प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं - एनआरएफ राज्य से बहुत कम फंड है (सार्वजनिक) - बहुसंख्यक कॉर्पोरेट - मौलिक अनुसंधान करने का कोई इतिहास नहीं - विभिन्न बयान जारी किए - 8-10 स्थिति पत्र - सामग्री को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित करने की आवश्यकता है - प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाता है - सभी आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में शिक्षा पर एक सम्मेलन - टीएन इसकी मेजबानी कर सकता है।
निर्णय: एनआरएफ और आईकेएस पर अभियान और शिक्षा पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन की आवश्यकता है, जिसे इस वर्ष क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान तमिलनाडु विज्ञान मंच द्वारा आयोजित किया जा सकता है।
आईकेएस पर: इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए: आईकेएस पर बजटीय आवंटन। मौजूदा विकल्पों की स्थिति क्या है- अधिक हाशिए पर रहने वाले वर्ग के लोग छात्र- हमें इसका आकलन करने की जरूरत है। गंभीर रूप से देखने के लिए मुख्यधारा के आईकेएस संसाधनों का विकल्प- टूल की आवश्यकता- हम अपना स्थान कैसे ढूंढ सकते हैं? आज हमें IKS जैसे कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चयन करना चाहिए। हम दिल्ली में आईकेएस-आईकेएस पर एक गोलमेज बैठक कर सकते हैं - यूजीसी आईकेएस आधारित गतिविधियों को करने के लिए बहुत दबाव डाल रहा है - विभिन्न विषयों के लोग - शैक्षणिक - सरकारें एनईपी लागू कर रही हैं - आईकेएस पर एक कठोर अध्ययन की आवश्यकता है - विरासत पर वास्तविक ज्ञान - चर्चा सहायक होगी - कैलेंडर प्रभावी रहा है - बजट आवंटन इस बात पर ध्यान नहीं देता है कि आईकेएस में कितने संसाधन जा रहे हैं -हमें उन चैनलों को समझने के लिए विश्वविद्यालयों पर गहराई से केस अध्ययन करने की आवश्यकता है जिनके माध्यम से इन संसाधनों को प्रसारित किया जा रहा है - वैध और सट्टा के बीच अंतर करना - क्या प्रचारित किया जा रहा है - राज्य स्तर पर, हमें समूह बनाना चाहिए और निश्चित समयसीमा के साथ चीजों की योजना बनानी चाहिए - एआईपीएससी संकल्प के लिए टीवीवी के नोट को आधार सामग्री के रूप में लिया जा सकता है।
एनआरएफ पर: एनआरएफ पर हमारे बयान की फिर से जांच की जा सकती है और कार्रवाई का उपयुक्त कार्यक्रम तय किया जा सकता है
शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन पर: हमें एनईपी के 5 वर्षों पर काम करने की जरूरत है। हमने राज्यों की स्थिति जानने के लिए एक प्रश्नावली और सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का एक प्रारूप प्रसारित किया है। ये लंबित हैं. एक सम्मेलन इन मुद्दों को सामने लाने में मदद करेगा - एनईपी के पांच वर्षों पर एक सर्वेक्षण और मानव संसाधन शिक्षा और स्कूल शिक्षा के लिए राज्य स्तर पर सार्वजनिक सुनवाई - को लोगों के दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
डेस्क प्रस्ताव: संयोजक - राजमणिक्कम (जारी) अन्य सदस्यों के साथ। सुझाए गए नए सदस्य बनिता सकलानी, सत्यजीत चक्रवर्ती, सत्यजीत रथ (अध्यक्ष) और आशा मिश्रा जनरल सेक्रेटरी (पदेन) हैं और FOCET देबाशीष कुंडू के एक प्रतिनिधि को लिया जा सकता है:
इस जोड़े गए सदस्यों के साथ डेस्क और उसके सदस्यों के लिए नए प्रस्ताव निम्नलिखित हैं: इस अवधि के लिए डेस्क:
1. P.Rajamanickam, Convenor 2.Dr.Retheesh Krishnan, Jt.Convenor, KSSP, 3.Dr.Salim Shah, Jt.Convenor, Tripura, 4. Gen. Sec. Asha, Ex-officio, 5.Prez Dr. Satyajit Rath, Ex-officio, 6.Dr. Satyajit Chakrobarthy, Jt. Sec. 7.Dr.S.Krishnasamy VP, 8.Dr. Promod, Jt. Sec. 9.Dr. Prajval VP, 10.Dr.Dinesh Abrol, EC, 11.Dr.Imam Ali Khan, Jharkhand, 12.Dr.Shyamal Chakroborty PBVM, 13. Dr. Mani (EC) / Dr.Ramanujam, TNSF, 14. Dr.Ranjit Chowthry, Assam, 15.Dr.P.N.Verma, MP, 16.Dr.Saibal Ray Tripura, 17. Dr.Banita Saklani, HVGS, 18.Y.S Nageswar, JVV 19. Debasshis Kundu, FOCET, member.
[28/8, 6:58 pm] Sabka Haryana: 10-07-2025
AIPSN EC- 13 और 14 जुलाई 2025, दिल्ली में
स्कूली शिक्षा - चर्चा नोट
शिक्षा डेस्क द्वारा प्रस्तुत चर्चा नोट के आधार पर निम्नलिखित निर्णय लिये गये
पृष्ठभूमि
स्कूली शिक्षा पर एआईपीएससी कोलकाता संकल्प
एनईपी को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की कार्रवाई
पृष्ठभूमि
स्कूली शिक्षा पर एआईपीएससी कोलकाता संकल्प
एनईपी को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार अपने सभी अंगों का उपयोग करके एनईपी 2020 पर बुलडोजर चला रही है। जब एनईपी 2020 की घोषणा की गई थी, तो धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक संगठनों ने चेतावनी दी थी कि यह नीति संघवाद की संवैधानिक स्थिति को नकार कर अत्यधिक केंद्रीकरण को बढ़ावा देगी और इससे सांप्रदायिकरण और निजीकरण या निगमीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अंततः राज्य स्कूली शिक्षा से पीछे हट जाएगा। प्रगतिशील ताकतों की सभी चेतावनियाँ वास्तविकता बन जाती हैं।
केंद्र सरकार स्कूली शिक्षा में एनईपी को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं को अंग के रूप में उपयोग कर रही है। संघ सरकार. पीएम श्री स्कूलों को लागू नहीं करने के लिए केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए समग्रशिखा निधि से इनकार कर दिया गया।
स्कूल विलय या क्लस्टरिंग कहकर बड़े पैमाने पर स्कूलों को बंद किया जा रहा है। U-DISE+ डेटा वास्तविक आंकड़ों का खुलासा करता है। नीति आयोग अपनी रिपोर्ट के माध्यम से सभी प्रकार के निर्देश प्रदान करता है।
कई राज्य सरकारों ने स्कूलों का विलय या बंद करके स्कूली शिक्षा सुविधाओं को कम करना शुरू कर दिया, जिससे पास के सार्वजनिक वित्त पोषित स्कूलों में बच्चों के सीखने के अधिकार पर असर पड़ना शुरू हो गया।
एनसीईआरटी और यहां तक कि सीबीएसई बोर्डों का उपयोग करके केंद्र सरकार जानबूझकर पाठ्य पुस्तकों में छेड़छाड़ करके स्कूली पाठ्यक्रम की सामग्री में अपने सांप्रदायिक हित को आगे बढ़ा रही है और इस प्रकार सामग्री भार को कम करने के नाम पर सभी प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सामग्री को खत्म कर रही है।
स्कूलों में कॉरपोरेट एनजीओ को खुली छूट देकर कॉरपोरेटीकरण। और कॉरपोरेट ऑनलाइन कक्षाओं पर जोर दे रहे हैं।
अब केंद्र सरकार ने मूल्यांकन के एकीकृत कदमों की घोषणा की है। राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र काउंटी के लिए संपूर्ण मूल्यांकन का प्रबंधन करेगा। केंद्र सरकार एक डेटा प्रणाली विकसित करके शैक्षणिक पहलुओं को भी केंद्रीकृत करने की कोशिश कर रही है जो अंततः स्कूल प्रणाली को अस्थिर कर देगी जिसके परिणामस्वरूप हाशिए पर और वंचित परिवारों से आने वाले बच्चों को बाहर कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार राज्य सरकारों के माध्यम से गैर-हिंदी राज्यों की प्राथमिक कक्षाओं में भी हिंदी को बढ़ावा दे रही है। महाराष्ट्र में लोगों के विरोध के कारण राज्य सरकार को हिंदी लागू करने के अपने प्रयास से पीछे हटना पड़ा।
तेलंगाना में, शिक्षा विभाग ने एक समिति नियुक्त की और समिति ने बड़े स्कूलों की सिफारिश की, जिससे राज्य सरकार पड़ोस के स्कूलों को बंद कर सके।
कार्य योजना: एनईपी को एकतरफा थोपे जाने का विरोध करने के लिए आगे का रास्ता।
जन प्रतिरोध आंदोलन और सामूहिक कार्रवाई का विकास करना ही केंद्र सरकार की जनविरोधी शैक्षिक नीतियों को प्रतिबंधित करने का एकमात्र तरीका है। जहां भी मुद्दा-आधारित समूहों के नेतृत्व में प्रतिरोध की आवाजें उठीं, संबंधित सरकारों को जनविरोधी और तदर्थ निर्णयों को वापस लेने या रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह सबक हमें पूरे देश में अपने अनुभव से सीखना होगा।
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक सभा सभी समान विचारधारा वाले धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक आंदोलनों को एक साथ लाने और प्रतिरोध के लिए साझा मंच बनाने को सुविधाजनक बनाने और सुनिश्चित करने की एक महान पहल थी। शिक्षा सभा ने बहुत ऊर्जा प्रदान की। लेकिन हम नियमित अनुवर्ती कार्रवाई के माध्यम से गति को बरकरार नहीं रख सके। हमें अपना प्रयास जारी रखना होगा और नई रणनीतियों के बारे में सोचना होगा।
राज्य संगठन अभी भी एआईपीएसएन ईसी द्वारा 2022 से एनईपी के संदर्भ में सुझाए गए निम्नलिखित कार्य कार्यक्रमों पर विचार कर सकते हैं, जो अभी भी प्रासंगिक हैं, जैसे:
मुद्दे आधारित साझा मंच बनाना और प्रतिरोध के लिए कार्रवाई तैयार करना।
सभी राज्यों में राज्य विशिष्ट मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए एक प्रेस नोट जारी करना।
केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्रतिगामी उपायों को उजागर करने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस।
टाउनशिप में छोटे समूह का विरोध प्रदर्शन।
एनईपी और इसके कार्यान्वयन के बाद के प्रभावों के बारे में राय बनाने वालों और मध्यम वर्ग को जागरूक करने के लिए सेमिनार और संवाद।
सोशल मीडिया कैंपेन करना.
संयुक्त कार्रवाइयां जो जनता का ध्यान आकर्षित कर सकती हैं।
संबंधित राज्यों में एनईपी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कार्यान्वयन की निगरानी के लिए प्रत्येक राज्य में एक छोटी टीम का गठन किया जाना है।
सामुदायिक शिक्षण केंद्रों को मजबूत करना और आम लोगों से जुड़ाव के लिए उन्हें नोडल केंद्र बनाना।
एआईपीएससी कोलकाता द्वारा सुझाए गए कार्य बिंदु
केंद्र सरकार की तानाशाही से निपटने के लिए समान विचारधारा वाले संगठनों, व्यक्तियों और शिक्षाविदों को एक साझा मंच पर लाने के लिए सचेत प्रयासों की आवश्यकता है। विभिन्न आधिकारिक अंगों को उपकरणों के रूप में उपयोग करके एनईपी 2020 को लागू करना।
लोगों को एनईपी 2020 के प्रत्यक्ष और छिपे खतरों को समझाने के लिए उनके साथ बड़े पैमाने पर संवाद की आवश्यकता है। एनईपी 2020 के प्रमुख क्षेत्रों में से एक सार्वजनिक वित्त पोषित स्कूलों को बंद करना और निजी स्कूलों को बढ़ावा देना है जो अंततः देश की अधिकांश आबादी की शैक्षिक आकांक्षाओं को समाप्त कर देते हैं। संघ सरकार. सामान्य स्कूल प्रणाली का आकार छोटा करने के लिए स्कूल बंद करने और विलय की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। इसलिए प्रतिरोध की आवाज़ें, लोगों को शिक्षित करना और वकालत करना महत्वपूर्ण है। हमें उसके लिए एक योजना बनानी होगी।
हमें राष्ट्रीय पाठ्यपुस्तक, मूल्यांकन, कार्य एकीकृत पाठ्यक्रम आदि पर पीएसएम स्थिति के संबंध में एक वैकल्पिक नीति या स्थिति पत्र विकसित करने की गुंजाइश तलाशनी होगी।
सामुदायिक शिक्षण केंद्रों के माध्यम से हम हाशिए पर रहने वाले और सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सहायता प्रदान कर सकते हैं। बीजीवीएस के साथ सहयोग करते हुए हमें बड़ी संख्या में सामुदायिक शिक्षण केंद्र शुरू करने होंगे। सामुदायिक शिक्षण केंद्र सामुदायिक संपर्क के लिए मीडिया के रूप में कार्य करेंगे।
पहले 5 वर्षों में एनईपी 2020 के पिछले दरवाजे से कार्यान्वयन का जायजा लेने की गुंजाइश और जरूरत है। हमें 'एनईपी 2020 के 5 वर्षों की एक पीपुल्स रिपोर्ट' विकसित करने की योजना बनानी होगी। इसके एक हिस्से के रूप में प्रत्येक राज्य को साक्ष्यों और केस स्टडीज के साथ वर्तमान स्थिति के साथ स्कूली शिक्षा पर एक स्टेटस पेपर तैयार करना होगा।
एजुकेशन डेस्क ने सुझाव दिया
संवाद और सेमिनार से हटकर दिखाई देने वाली गतिविधियां। उच्च स्तरीय सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग समन्वित अभियानों का सुझाव दे सकता है।
एआईपीएसएन और बीजीवीएस को सामुदायिक शिक्षण केंद्रों के माध्यम से बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता को पूरा करना है और हमारे संगठन से जुड़े शिक्षकों को शैक्षणिक सहायता प्रदान करनी है। बीजीवीएस बिहार ने नवादा में दो दिवसीय शिक्षक कार्यशाला का आयोजन किया, कार्यशाला में इस तरह की शैक्षणिक सभा की गुंजाइश का पता चला। सामुदायिक शिक्षण केंद्रों के कार्यकर्ताओं और औपचारिक प्रणाली के शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए वित्तीय संसाधनों का पता लगाना मुख्य चुनौती है जिस पर हमें ध्यान देना होगा।
एनईपी के पांच वर्षों की लोगों की रिपोर्ट विकसित करें। ईसी से सुझाव और अनुमोदन प्राप्त करने के बाद, स्कूल शिक्षा डेस्क कार्यप्रणाली और समयबद्ध कार्य योजना तैयार करेगा। हम इस अवसर का उपयोग जमीनी स्तर या क्षेत्रीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक शिक्षाविदों और आम जनता दोनों को एकजुट करने के लिए कर सकते हैं। क्षेत्र स्तर से डेटा या जानकारी एकत्र करना विभिन्न स्तरों पर सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से किया जा सकता है। इसे हम एक अभियान के रूप में बदल सकते हैं. एआईपीएसएन और बीजीवीएस सामूहिक रूप से यह कार्य करेंगे।
फैसले
एआईपीएसएन राष्ट्रीय केंद्र को 30 अप्रैल 2023 में आयोजित दिल्ली सम्मेलन की निरंतरता में राष्ट्रीय मंच को मजबूत करने की गुंजाइश तलाशनी है।
सभी राज्य स्तरीय संगठनों को राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर मुद्दे आधारित साझा मंचों के गठन का पता लगाना होगा। प्रत्येक संगठन अधिक से अधिक जनभागीदारी के साथ संभावित दृश्यमान अभियान तैयार करेगा।
एआईपीएसएन स्कूली शिक्षा पर 'एनईपी 2020 के 5 वर्षों की पीपुल्स रिपोर्ट' तैयार करेगा। स्कूल शिक्षा डेस्क को इसके लिए समय-सीमा के साथ एक कार्य कार्यक्रम सुझाने का काम सौंपा गया है। एआईपीएसएन और बीजीवीएस सामूहिक रूप से यह कार्य करेंगे।
बीजीवीएस एआईपीएसएन के साथ सहयोग करके सामुदायिक शिक्षण केंद्रों के दायरे का पता लगाया जाएगा और उन केंद्रों का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ताओं को अकादमिक सहायता प्रदान की जाएगी।
बीजीवीएस एआईपीएसएन के साथ सहयोग करके उन शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने की संभावनाओं पर गौर किया जाएगा जो औपचारिक प्रणाली का हिस्सा हैं।
राज्य संगठन अभी भी एआईपीएसएन ईसी द्वारा 2022 से एनईपी के संदर्भ में सुझाए गए निम्नलिखित कार्य कार्यक्रमों पर विचार कर सकते हैं, जो अभी भी प्रासंगिक हैं, जैसे:
मुद्दे आधारित साझा मंच बनाना और प्रतिरोध के लिए कार्रवाई तैयार करना।
सभी राज्यों में राज्य विशिष्ट मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए एक प्रेस नोट जारी करना।
केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्रतिगामी उपायों को उजागर करने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस।
टाउनशिप में छोटे समूह का विरोध प्रदर्शन।
एनईपी और इसके कार्यान्वयन के बाद के प्रभावों के बारे में राय बनाने वालों और मध्यम वर्ग को जागरूक करने के लिए सेमिनार और संवाद।
सोशल मीडिया कैंपेन करना.
संयुक्त कार्रवाइयां जो जनता का ध्यान आकर्षित कर सकती हैं।
संबंधित राज्यों में एनईपी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कार्यान्वयन की निगरानी के लिए प्रत्येक राज्य में एक छोटी टीम का गठन किया जाना है।
सामुदायिक शिक्षण केंद्रों को मजबूत करना और आम लोगों से जुड़ाव के लिए उन्हें नोडल केंद्र बनाना।
एजुकेशन डेस्क
डेस्क सदस्यों के संबंध में सुझाव-
नहीं
नाम
फ़ोन
ईमेल. पहचान
1
गीता महाशब्दे
9822614682
geetamahashabde@gmail.com
नव निर्मिति
2
प्रोफेसर अनिता रामपाल
9810098307
anita.rampal@gmail.com
एडु. विशेषज्ञ
3
कमला मेनन
9810010751
kamalmenon@gmail.com
डीएसएफ
4
डॉ बिप्लब घोष
7896359205
biplabghsh22@gmail.com
बीजीवीएस
5
मीरा बाई
9846845178
meerajinan@gmail.com
केएसएसपी
6
बाला सुब्रमण्यम
9490098912
jvvvbs@rediffmail.com
जेवीवी आंध्र
7
डॉ. शीशपाल
9671558890
जीवीएस हरियाणा
8
ब्लोरिन मोहंती
9437111204
blorin2008@gmail.com
ओडिशा बीजीवीएस
9
अनूप सरकार
9433078639
पश्चिम बंगाल
10
दिनेश अब्रोल
9650365397
dinesh.abrol@gmail.com
डीएसएफ
11
डॉ.एन.माधवन
9443724762
thulirmadhavan@gmail.com
टीएनएसएफ
12
डॉ.काशीनाथ चटर्जी
7004266970
Chatterjeekashinath@gmail.com
बीजीवीएस
19
यमुना सनी
9329802189
yemunas@gmail.com
एडु. कार्यकर्ता
20
सुब्रमणी
7598340424
Subramanitnsf@gmail.com
टीएनएसएफ
21
शुभंकर
9449045096
Subhankarcheck@gmail.com
बीजीवीएस कर्नाटक
22
शंकरादेवी
9786904532
पुदुचेरी
23
डॉ.एम.वी. गंगाधरन
9495073510
mvgkanikkonna@gmail.com
केएसएसपी
EC ने डेस्क संयोजक के अनुरोध को मंजूरी दे दी कि माधवन (दक्षिण क्षेत्र), गीता महाशब्दे (मध्य और पश्चिमी क्षेत्र), डॉ शीशपाल (उत्तर क्षेत्र), ब्लोरिन मोहंती (पूर्व क्षेत्र), बिप्लब घोष (उत्तर पूर्व) संबंधित क्षेत्र की गतिविधियों के समन्वय के लिए डेस्क संयोजक का समर्थन करेंगे।
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों को आमंत्रित कर सकते हैं।
आवश्यकता पड़ने पर संबंधित संस्थाओं के स्कूली शिक्षा के संयोजकों को आमंत्रित कर सकते हैं।
डॉ.सी.रामकृष्णन
9446464727
crpilicode@gmail.com
संयोजक स्कूल शिक्षा डेस्क
[28/8, 8:15 pm] Sabka Haryana: 4.07.2023 को आयोजित एससी पॉप और एससी टेम डेस्क बैठक का कार्यवृत्त (ऑन-लाइन)
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बैठक में एनएसटीडी 2023 पर निम्नलिखित कार्य योजना और साल भर की गतिविधियों को अंतिम रूप दिया गया
एनएसटीडी-2025
1.डेस्क ने इस मुद्दे पर चर्चा की और ईसी के विचार के लिए निम्नलिखित का समाधान किया।
ए) एनएसटीडी-2025 में भाग लेने के लिए अपील और हस्ताक्षर अभियान एस कृष्णास्वामी द्वारा तैयार किया जाएगा। आगे संकल्प लिया कि अपील का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा और व्यापक चर्चा की जाएगी, ताकि हस्ताक्षर संग्रह सिर्फ एक अनुष्ठान न बन जाए।
बी) गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 18 अगस्त को एक ऑनलाइन व्याख्यान की व्यवस्था की जाएगी। चर्चा का विषय 'वैज्ञानिक स्वभाव और आज का भारत' होगा। प्रस्तावित वक्ता मीरा नंदा और गौहर राजा हैं।
सी) 20 अगस्त को अपील के फोकस को उजागर करते हुए विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से, सभी राज्यों में, जितना संभव हो उतने स्थानों पर, राष्ट्रीय वैज्ञानिक स्वभाव दिवस भौतिक रूप से मनाया जाएगा।
डी) डेस्क की ओर से, डॉ. विवेक मोंटेइरो दावोलकर नार्लिकर और वैज्ञानिक सोच के प्रचार-प्रसार में उनकी भूमिका पर एक नोट तैयार करेंगे।
ई) पोस्टर, वैज्ञानिकों के वीडियो क्लिप और एक्स हैंडल अभियान के साथ सोशल मीडिया अभियान आयोजित किया जाएगा।
एफ) इस वर्ष 6-9 अगस्त को बड़े पैमाने पर युद्ध विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। मध्य पूर्व और यूरोप में युद्ध परिदृश्यों पर चर्चा की जाएगी, और पूंजीवादी युद्ध कूटनीति और साजिश को दबाने वाली शांति की पुकार पर प्रकाश डाला जाएगा। डेस्क ने 5 अगस्त को ईएएस शर्मा और एक अन्य हिंदी युद्ध और शांति विभाग के साथ एक ऑनलाइन चर्चा आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।
जी) 2 अगस्त को प्रफुल्ल चंद्र रॉय का जन्मदिन, 30 अगस्त को कलबुर्गी हत्या दिवस और 5 सितंबर को गौरी लोनकेश हत्या दिवस भी मनाया जाएगा।
2. रूढ़िवादिता, अंधविश्वास, छद्म विज्ञान, धार्मिकता, कट्टरवाद, धर्मनिरपेक्षता और उत्पीड़न से लड़ना मुख्य उद्देश्य रखते हुए डेस्क ने एक साल का कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया। आरएसएस की विचारधारा को उचित रूप से समझने और उससे लड़ने के लिए, और काउंटर नैरेटिव के साथ हमारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए, डेस्क ने प्रत्येक राज्य से 4-5 कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए 2 - 3 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का प्रस्ताव रखा। प्रदेश स्तरीय वैचारिक शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक कार्यकर्ता तैयार किये जायेंगे। सशक्त एवं सक्षम राज्य जिला स्तरीय वैचारिक शिविर भी आयोजित कर सकते हैं।
आगे यह निर्णय लिया गया कि इस राष्ट्रीय शिविर के लिए पाठ्यक्रम (विषय) और वक्ताओं को डिजाइन करने और भविष्य की गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक विचार-मंथन बैठक आयोजित की जाएगी। राष्ट्रीय कार्यकर्ता शिविर के लिए हैदराबाद संभावित स्थान हो सकता है। हम दिल्ली में एक दिवसीय विचार-मंथन शिविर का आयोजन कर सकते हैं।
3. अलग-अलग दिन हमेशा की तरह मनाए जाएंगे.
बैठक की अध्यक्षता मिहिरलाल रे ने की और विवेक, एसके, श्रीनिवास, चित्रा, सतबीर, टीवी, महेश, बसब्रजू, मुरलीधर और अरुणाभा ने भाग लिया। बैठक अध्यक्ष को धन्यवाद ज्ञापन के साथ समाप्त हुई।
अरुणाभा मिश्रा
संयोजक
8.7.25
Tuesday, July 15, 2025
culture aipsn
***सांस्कृतिक डेस्क के लिए प्रस्तावित योजना**
पृष्ठभूमि:
लोगों का जीवन गंभीर संकटों से गुजर रहा है. हर मोर्चे पर अंधेरा नजर आ रहा है. हमें और हमारे देश को समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने और उन्हें वास्तविकता में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। लेकिन नफरत और असमानता का माहौल इतना व्यापक है कि इंसान किसी भी तरह अपनी जान बचाने और अपना अस्तित्व बचाने के लिए मजबूर नजर आता है। यह नफरत, पदानुक्रम और असमानता अपने आप नहीं फैल रही है बल्कि बहुत संगठित रणनीति के माध्यम से प्रचारित और कायम की जा रही है। यह संपूर्ण सत्ता संरचना, सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थानों, मीडिया, शिक्षा प्रणाली और त्योहारों में घुसपैठ और दमन के माध्यम से किया जा रहा है। संक्षेप में, मनुष्य की मानवता को ही चुनौती दी जा रही है।
इसके खिलाफ उठने वाली आवाजों और पुकारों की कमी नहीं है और लोग गुस्से और बेचैनी से भी भरे हुए हैं. बेहतर भविष्य बनाने की आवश्यकता भी बहुत अधिक है। ऐसे में हमें अपना अभियान लोगों की मानवता को जागृत करने के आह्वान के साथ बनाना चाहिए। हमें उन्हें अपने और अपने देश के लिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए गुलामी, लाचारी और निराशा की मानसिकता से लड़ने की दिशा में सोचने और काम करने की ओर ले जाना चाहिए। यह कार्य दीर्घकालिक एवं व्यापक पहल से ही संभव होगा। लेकिन उस दिशा में कदम तो उठाया ही जाना चाहिए. यह सिर्फ एक गतिविधि या अभियान के बारे में नहीं है बल्कि एक सतत आंदोलन शुरू करने के बारे में है। हमें छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ना चाहिए।
*एक वर्ष की कार्य योजना:
ऐसे व्यापक अभियान के लिए अनेक कार्य पम्पलेट, ब्रोशर, बैठकें, सेमीनार, कार्यशालाएँ तथा सम्मेलनों के माध्यम से किये जाने चाहिए तथा कुछ कार्य सांस्कृतिक रूपों में भी किये जाने चाहिए। सांस्कृतिक हस्तक्षेपों में नए, प्रभावशाली प्रयोगों की तत्काल आवश्यकता है। जमीनी स्तर के सांस्कृतिक कार्यों के साथ-साथ, साइबरस्पेस का पूर्ण उपयोग करने की भी सख्त आवश्यकता है।
1. जहां भी संभव हो, राज्यों के सांस्कृतिक कोर समूहों के साथ उनकी स्थितियों को समझने के लिए अलग-अलग बैठकें आयोजित करें और जहां आवश्यक हो, सांस्कृतिक समूहों का गठन या पुनर्गठन करें।
2.सांस्कृतिक डेस्क और राज्यों के प्रमुख कलाकारों को आज के परिदृश्य और आवश्यक सांस्कृतिक हस्तक्षेप के परिप्रेक्ष्य पर गंभीर चर्चा में शामिल होना चाहिए। इसके लिए कम से कम तीन या चार दिन की कार्यशाला आयोजित की जा सकती है, जिसमें पहले से तैयार चर्चा सामग्री उपलब्ध करायी जाये।
3.हिन्दी भाषी राज्यों में नये गीतों के लिये 4-5 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन करें। हमें नये गानों की सख्त जरूरत है. नए विषयों के साथ-साथ नई धुनों की भी जरूरत है. हालाँकि हमारे राज्यों में नए गीतों की रचना की गई है और उन्हें वहां गाया भी जाता है, लेकिन लंबे समय से राज्यों के बीच नए गीतों का आदान-प्रदान नहीं हुआ है। हमारी वर्कशॉप इसी दिशा में काम करेगी.
4.फिर, अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्यशालाएँ आयोजित करने का प्रयास करें।
5.पिछले 10-12 वर्षों से, विशेषकर हमारे राज्यों में, कलाकारों को जुटाने या धन की व्यवस्था करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। ऐसे में हमें नए रास्ते तलाशने की जरूरत है। बड़े नाटकों और कला दस्तों के अलावा हमें अन्य विधाओं पर भी काम करना चाहिए। इस दिशा में छोटे-छोटे नाटक, एकल प्रदर्शन और स्टैंड-अप कॉमेडी जैसे नए प्रयोग नई संभावनाएं जगा सकते हैं। हमें इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित करने की जरूरत है।'
6.फिल्मों और डाक्यूमेंट्री फिल्मों का सचेत होकर उपयोग करने की जरूरत है।
7.एक सांस्कृतिक प्रयोगशाला/कार्यशाला की स्थापना की जानी चाहिए, जहाँ हमारे संगठनों से जुड़े कलाकारों, लेखकों और चित्रकारों को एक साथ चर्चा करने और काम करने का अवसर मिले।
8.नफरत और कट्टरता के खिलाफ राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर के अभियान आयोजित करें, आपसी सहयोग को बढ़ावा दें और सामाजिक न्याय की वकालत करें। यह हमारे सांस्कृतिक ढांचे को बनाए रखने और मजबूत करते हुए वैज्ञानिक जागरूकता, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर सामग्री तैयार करके किया जाना चाहिए।
* सांस्कृतिक डेस्क सदस्य:
नए सदस्य केरल से राजशेखरन, तमिलनाडु से शशि कुमार, महाराष्ट्र से तुलसी, हिमाचल प्रदेश से जियानंद, उत्तराखंड से सतीश, बिहार से मुरली प्रसाद, ओडिशा से बिजय, बंगाल से मौसमी चटर्जी, बंगाल से राहुल, असम, एपी, एमपी, झारखंड से प्रभात, सोशल मीडिया के लिए कविता, नरेश प्रेरणा,
संयोजक, आशा, महासचिव। ****** 10-07-2025
Sunday, June 22, 2025
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