Saturday, January 1, 2011

इम्तिहान

हमारा इम्तिहान लिया हर बार पास हुए
सब कुछ तुम्हारे पास फिर भी उदास हुए
पता है तुम्हारा तुम एक अमर बेल हो
रब राखा क़िस्मत का रचा रहे खेल हो
तुम्हारा अहम् और ये अहंकार
दिखाता अन्दर का पूरा अंधकार
अंधी गली में तुम बढ़ते जा रहे
अपनी मौत के श्लोक पढ़ते जा रहे

आर्यन मिथ

आर्यन मिथ
सफेद चमड़ी और नीली आंखों के साथ आर्य श्रेष्ठता और पहचान नाजी जर्मनी नसलीय मान्यताओं का एक मजबूत घटक है. यह बड़े नस्लीय निर्माण का मामला बहुत अन्तरंग ढंग से साम्राज्यवाद से जुड़ा था. वैज्ञानिकों के एक हिस्से ने नृविज्ञान, भाषा विज्ञान और जीव विज्ञान के उभरते विषयों का इस्तेमाल करके विकासवादी बहस के माध्यम (Survival of the fittest ) से क्रूर औपनिवेशिक दमन और नरसंहार को औचित्य.प्रदान करने का दुस्साहस किया | यह आश्चर्य की बात है कि आरएसएस, हिटलर के लिए अपनी प्रशंसा के साथ, बेहतर आर्यन रेस के माध्यम से भारत के इतिहास को पुनर व्याख्यायित करने की कोशिश में दिखाई देती है|

कारोबार नया साल हुआ

आज नए साल का मनाना भी एक कारोबार हों गया
बनावटी पन लटके झटके मस्त हमारा घरोबार हों गया
कैटरिना मलायका के ठुमके कैसी इन्तहा ये बेहयाई की
देखके पूरा हिंदुस्तान ख़ुशी से कितना ये सरोबर हों गया
एक फुटपाथ पर बैठा हुआ वह यह सब देख रहा है
दो चार लकड़ी इकठी करके हाथ अपने सेक रहा है
सामने दुकान पर देखी ठुमकों की झलक थोड़ी सी
घरवाली ने देख लिया तो सच मुच ही झेंप रहा है
नए साल का जश्न मनाकर आज मुंबई छाई देखो
ठिठुरे बचपन और जवानी ये गाँव की रुसवाई देखो
लड़की maरके पेट में हमने लूटी है वाह वाही देखो
शराब नशा और मस्ती ठुमकों की ये बेहयाई देखो
गला काट मुकाबला आज दुनिया में है छाया देखो
भाई का भाई दुश्मन इसने यहाँ पर है बनाया देखो
आखिर कहाँ जा रहे है हम जरा देर सोचो तो यारो
इंसानियत का चेहरा यहाँ पर किसने है चुराया देखो

क्या कहूं

सौ बार मरना चाहा आँखों में डूबकर के हमने
हर बार निगाहें झुका लेते हमें मरने नहीं देते
तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना सकता हूँ मैं
तुझसे मिले बिना तेरा हाल बता सकता हूँ मैं
दिल में क्या है तेरे सब तो जता सकता हूँ मैं
क्या सोचते रहते दिन भर गिना सकता हूँ मैं


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हम और वो

मिला वो भी नहीं करते , मिला हम भी नहीं करते
गिला वो भी नहीं करते , शिकवा हम भी नहीं करते
किसी मौड़ पर टकराव हों जाता है अक्सर हमारा
रुका वो भी नहीं करते , ठहरा हम भी नहीं करते

नए साल का झुनझुना

हमें आये साल नए साल के नाम पर
कुछ वायदों का ये झुनझुना पकड़ा कर
चले जाते हैं वापिस हमारे प्यारे आका
फिर पूरे साल हम चक्कर काटते रहते
चल रहा है सिलसिला साल दर साल ये
मगर उम्मीद हमने भी नहीं छोड़ी यारो

मेरी शादी से पहले

मेरी शादी से पहले परिवार ने
खूब पूछताछ छानबीन की थी
बहुत गुणवान लड़का है कोई
मांग नहीं हैं उनकी सीधे सादे
सैल पर दो एक बार बात की
सपनों के संसार में खो गए हम
बस झट मंगनी और पट ब्याह
महीना दो महीना बहुत यादगार
गुजर गया वक्त पता नहीं चला
फिर असली जिन्दगी से सामना
हुआ मेरा तो बस धडाम से गिरी
सोचा यह सब किससे साँझा करूँ ?
या फिर घुट घुट के मैं यूं ही मरूं
उसकी शिकायत कि माँ को मैं
बिल्कुल खुश नहीं रख पा रही हूँ
बहुत देर बाद समझ आया कि
खुश ना रहने का दिखावा करती माँ
मुझे प्रताड़ित करना फितरत ये
माँ की बनता चला गया समझो
बहुत कोशिश की मैंने तो दिल से
मगर तीन साल में परिवार पूरा
कलह का अखाडा सा बन गया
मेरी माँ (सास) तीन साल हुए हैं
मुझसे बोलती ही नहीं है कभी
पूरा परिवार बायकाट पर उतरा
ऐसे में पति देव भी अब तो
छोटी छोटी बात के बहाने ही
मुझ में कमियां देखने लगे हैं
मेरे परिवार की विडम्बना पर
मुझे रोना आता है कई बार
मैंने तो लव मेरेज भी नहीं की
न ही एक गौत्र कि गलती की है
न ही एक गाँव में बसाया घर
दहेज़ जैसा बना वैसा तो लाई मैं
मैं जीन भी नहीं पहनती कभी भी
नौकरी भी करती हूँ और घर भी
पूरी तरह सम्भालती हूँ फिर भी
यह सब क्यों हों गया बताओ तो
हमारे बीच कोई लगाव न बचा
बस ये लोग क्या कहेंगे हमको
इस अदृश्य भय के कारण ही तो
हम एक छत के नीचे जी रहे
छत एक है मकान एक है
पर घर नहीं है यह हमारा
बंद करती हूँ यहीं पर मैं किस्सा
वर्ना अब खुल जायेगा पिटारा पूरा
आज का दौर नाज्जुक दौर है
मैं दुखी हूँ तो पति खुश है
ऐसी बात नहीं मानती हूँ मैं
दुखी वे भी बहुत जानती मैं
मगर क्या समाधान है इसका ?
एक साल मैं अपने पीहर रही
वहां भी बोझ ही समझी गयी
सासरे में दूरियां और बढ़ी मेरी
कई बार सोचा अलग हों जाऊं
अलग होंकर क्या हांसिल होगा
शायद पति के बिना नहीं रह
सकती मैं अकेले अकेले कहीं पर
तलाक का लोड सोच कांप जाती
समझौता कर के जीने की सोची
पता नहीं ठीक हूँ या गलत मैं !!!