[03/11, 10:34 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: खोखराकोट (Khokhrakot) हरियाणा के रोहतक शहर के बाहरी हिस्से में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक टीला एवं पुरातात्विक स्थल है।
खोखराकोट का इतिहास और मुख्य विशेषताएं:
• प्राचीनता और नामकरण:
• इस स्थान का उल्लेख महाभारत काल में 'रोहितिका' (Rohitika) के रूप में मिलता है। माना जाता है कि यह क्षेत्र कभी 'रोहितक' (रोहिड़ा के वृक्षों का जंगल) के नाम से जाना जाता था, जिससे आगे चलकर 'रोहतक' नाम पड़ा।
• लोकमान्यताओं के अनुसार, इसका नामकरण राजा रोहताश के नाम पर 'रोहताशगढ़' से भी जोड़ा जाता है। वहीं कुछ स्थानीय किंवदंतियों में इसके अंतिम शासक का संबंध 'खोखर' गोत्र से बताया गया है, जिसके कारण इसका नाम 'खोखरा कोट' (कोट का अर्थ किला होता है) पड़ा।
• महाभारत और पुरातात्विक साक्ष्य:
• यहां हुई खुदाई में 'पेंटेड ग्रे वेयर' (Painted Grey Ware - PGW) संस्कृति के बर्तन मिले हैं, जो महाभारत कालीन प्राचीनता की पुष्टि करते हैं।
• यह स्थल प्राचीन 'यौधेय गणराज्य' (Yaudheya Republic) की राजधानी भी रहा है।
• विभिन्न कालों के अवशेष:
• खोखराकोट की खुदाई से 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 11वीं शताब्दी ईस्वी तक के विभिन्न कालखंडों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
• यहाँ से यौधेय, कुषाण, गुप्त काल और इंडो-ग्रीक (Indo-Greek) शासकों के सिक्के, सिक्के ढालने के सांचे (Coin moulds), टेराकोटा (पकी हुई मिट्टी) की मूर्तियां, खिलौने और प्राचीन वस्तुएं मिली हैं।
• यहाँ बौद्ध धर्म से जुड़ी मूर्तिकला के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।
• उत्खनन (Excavation):
• इस ऐतिहासिक स्थल की बड़े पैमाने पर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक के प्रो. मनमोहन कुमार और हरियाणा सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के श्री जे.एस. खत्री द्वारा संयुक्त रूप से खुदाई की गई थी।
• इसके अलावा यहाँ फिरोज खान का मकबरा भी है, जिसे भारत का सबसे शुरुआती मुगलकालीन मकबरा माना जाता है (निर्माण लगभग 1527 ईस्वी)।
[03/11, 10:59 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: रोहतक के गोहाना रोड पर स्थित पीर बहाउद्दीन (जिन्हें स्थानीय स्तर पर पीर बहुद्दी कहा जाता है) की मज़ार और यह पूरा क्षेत्र शहर का एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक कोना है। इस स्थान का इतिहास सूफ़ी संत परंपरा और रोहतक के मध्यकालीन इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस क्षेत्र के मुख्य ऐतिहासिक पहलू निम्नलिखित हैं:
1. सूफ़ी संत ख्वाजा बहाउद्दीन और उनका आगमन
इतिहासकारों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, पीर बहाउद्दीन जुचनेर (ईरान) से भारत आए थे। वे प्रसिद्ध सूफ़ी संत हज़रत निज़ाम-उद्दीन औलिया के खलीफ़ा (शिष्य) थे। उन्हें मध्यकाल में रोहतक क्षेत्र का मुख्य न्यायाधीश (काज़ी) भी नियुक्त किया गया था। उन्होंने गोहाना रोड के इस शांत क्षेत्र को अपनी इबादत और लोगों को मानवता की सीख देने का केंद्र बनाया।
2. मज़ार (ज़ियारत) का ऐतिहासिक महत्व
जिस स्थान पर पीर साहब ने अपना जीवन बिताया और जहाँ उनकी मज़ार (ज़ियारत पीर बहाउद्दीन) स्थित है, वह सदियों से सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रही है।
• विभाजन से पहले और आज भी, यहाँ केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही नहीं, बल्कि हिंदू, सिख और अन्य धर्मों के लोग भी मन्नत मांगने आते हैं।
• स्थानीय लोक-संस्कृति में उन्हें 'पीर बहुद्दी' के नाम से पुकारा जाता है और गोहाना रोड का यह पूरा इलाका इसी ऐतिहासिक मज़ार के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
3. गोहाना रोड का व्यापारिक और रणनीतिक इतिहास
रोहतक का इतिहास हज़ारों साल पुराना है, जिसका संबंध महाभारत काल (रोहितक) और राजा रोहताश से जोड़ा जाता है।
• मुगल और ब्रिटिश काल: दिल्ली से पंजाब और उत्तर की ओर जाने वाले रास्तों में रोहतक एक मुख्य पड़ाव था। गोहाना रोड प्राचीन समय से ही रोहतक को पानीपत, सोनीपत और गोहाना क्षेत्र से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग रहा है।
• 1857 की क्रांति: गोहाना रोड और इसके आस-पास के गांवों (जैसे सामड़ी, लाखन माजरा) ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश शासन के खिलाफ बढ़-चढ़कर भाग लिया था, जिसके बाद अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर कड़ा नियंत्रण कर लिया था।
आज आधुनिक विकास के साथ यह क्षेत्र एक व्यस्त रिहायशी और व्यावसायिक इलाका बन चुका है, लेकिन 'पीर बहुद्दी' का नाम आज भी रोहतक के समृद्ध ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अतीत की याद दिलाता
[03/11, 11:02 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: रोहतक के भिवानी स्टैंड के पास स्थित जामा मस्जिद और रोहतक की ऐतिहासिक मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
• भिवानी स्टैंड और जामा मस्जिद क्षेत्र: रोहतक शहर में भिवानी स्टैंड (Bhiwani Stand) के पास का इलाका और स्टेशन डायरी मोहल्ला पुराने शहरी ताने-बाने और धार्मिक स्थलों से जुड़ा हुआ है।
• महम की जामा मस्जिद का इतिहास (रोहतक जिला): रोहतक जिले के महम (Meham) कस्बे में स्थित प्रसिद्ध जामा मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट हुमाायूं के शासनकाल में 1531 ईस्वी में बेगम सुल्तान द्वारा करवाया गया था।
• औरंगजेब के समय जीर्णोद्धार: इस मस्जिद का 1667 ईस्वी में मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान ख्वाजा रहमत उल्लाह द्वारा जीर्णोद्धार या मरम्मत कराई गई थी।
• वर्तमान स्थिति: महम की इस ऐतिहासिक जामा मस्जिद को बाद में गुरुद्वारे के रूप में उपयोग में लाया गया है।
• रोहतक की अन्य मस्जिदें: रोहतक शहर में लाल मस्जिद (मस्जिद फिरदौस, जिसका निर्माण 1939 में व्यापारी हाजी अली द्वारा कराया गया था) और दीनी मस्जिद भी ऐतिहासिक रूप से काफी प्रसिद्ध
[03/11, 11:04 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: रोहतक की लाल मस्जिद (जिसे मस्जिद फिरदौस के नाम से भी जाना जाता है) हरियाणा के रोहतक शहर में किला रोड बाजार के एंट्री पॉइंट पर स्थित एक ऐतिहासिक और प्रमुख धार्मिक इमारत है।
इतिहास और निर्माण
• निर्माणकर्ता: इसका निर्माण हाजी आशिक अली ने करवाया था।
• समय अवधि: इस भव्य मस्जिद का निर्माण कार्य लगभग 1930 में शुरू हुआ था और करीब 10 साल की मेहनत के बाद 10 मई, 1939 को यह बनकर पूरी हुई।
• लाल रंग की पहचान: निर्माण के समय इसे लाल रंग से रंगा गया था, जिसकी वजह से इसे आम बोलचाल में 'लाल मस्जिद' कहा जाने लगा।
वास्तुकला और विशेषताएँ
• सामग्री: इसके निर्माण में राजस्थान, दिल्ली और कलकत्ता से लाए गए सफेद और काले संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।
• खासियत: इसमें प्रार्थना हॉल के अंदर कांच की बारीक नक्काशी और जापान की विशेष टाइलें लगाई गई हैं।
• मीनार और क्षमता: इसकी मीनार की ऊंचाई करीब 60 फीट है। रमजान के दौरान यहाँ 400 से 500 लोग एक साथ नमाज अदा करते हैं।
• अन्य सुविधा: यहाँ यात्रियों के ठहरने के लिए भी व्यवस्था बनाई गई थी।
आज भी यह मस्जिद रोहतक के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
क्या आप रोहतक की अन्य ऐतिहासिक मस्जिदों (जैसे शीशे वाली मस्जिद) या यहाँ के इतिहास के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं?
Jagran
रोहतक में हाजी आशिक अली ने कराई थी लाल मस्जिद की तामीर, 10 वर्षों में बनकर हुई थी तैयार - Haji Ashiq Ali had got the construction of Lal Masjid in Rohtak it was completed in 10 years
* Name: Lal Masjid (Masjid Firdaus) * Location: Rohtak (Killa Road Bazar, Delhi Road entrance) * Builder: Haji Ashiq Ali * Timeline: Started ~1930, completed 10...
Facebook·The Haryana Junction
लाल मस्जिद, रोहतक, हरियाणा रोहतक के किला रोड़ बाजार के एंट्री प्वांइट पर बनी इस मस्जिद को ...
13 May 2020 — रोहतक शहर की प्रमुख धार्मिक इमारतों में से एक, लाल मस्जिद, वास्तव में मस्जिद फिरदौस के नाम से जानी जाती है। इसका निर्माण हाजी आशिक अली ने करवाया था। लगभग दस वर्...
[03/11, 11:21 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: रोहतक में प्रताप टॉकीज (Pratap Talkies) एक ऐतिहासिक और पुराना सिनेमा हॉल हुआ करता था, जो अब बंद हो चुका है।
• स्थान / रोड: यह शोरी क्लॉथ मार्केट (Shorie Market) के पास, 'प्रताप टॉकीज रोड' (नागपाल रेस्टोरेंट के नजदीक) पर स्थित है।
• वर्तमान स्थिति: रोहतक के पुराने सिनेमाघरों (जैसे प्रताप, सुभाष, लिबर्टी आदि) में से एक होने के नाते यह जगह आज भी जानी जाती है, लेकिन अब यहाँ फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होता है।
• आस-पास का इलाका: वर्तमान में प्रताप टॉकीज रोड वाला क्षेत्र कपड़े के थोक और खुदरा व्यापार (जैसे लेडीज सूट और फैब्रिक स्टोर्स) के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में प्रसिद्ध है
No comments:
Post a Comment