Saturday, November 6, 2010

ALISAN HARYANA

मिल जुलकै नया हरयाणा हम घना आलिशान बनावांगे||
ना बराबरी खत्म करकै नै हरयाणा आसमान पहोंचावांगे ||
बासमती चावल हरयाने का दुनिया के देशां मैं जावै आज
चार पहियें की मोटर गाड़ी यो सबतें फालतू बनावै आज
खेल कूद मैं हम आगै बढ़गे एसिया मैं सम्मान बधावांगे ||
चोरी जारी थाग्गी नहीं रहवैन्गी भ्रष्टाचार नहीं टोह्या पावै
मैरिट तैं मिलैं दाखिले सबनै शिक्षा माफिया खड्या लखावै
मिल सारे हरयाणा वासी इन बाताँ नै परवान चढ़ावांगे ||
ठेकेदारां की ठेकेदारी ख़त्म होज्या ख़त्म थानेदारी होज्या
बदमाशों की बदमाशी ख़त्म होज्या ख़त्म फेर ताबेदारी होज्या
निर्माण और संघर्ष का नारा यो लगाके नै जी ज्यान उठावांगे||
दहेज़ खातिर दुखी होकै औरत नहीं फांसी खा हरयाणा मैं
कदम बढ़ाये एक बै आगै हटके ना पाछै जाँ हरयाणा मैं
बराबर का दर्जा देकै नै बंद कलियाँ के अरमान खिलावांगे ||
छुआ छूत का नहीं नाम रहै सब रल मिलकै रहै गामाँ मैं
प्यार मोहब्बत त्याग तपस्या सब कुछ झलकै कहैं गामाँ मैं
दिखा नया रास्ता समाज नै बिना बात का घमासान मिटावांगे||
हरयाणा के लड़के और लड़की कन्धे तै कन्धा मिला चालैंगे
देकै क़ुरबानी ये छोरी छोरे नए हरयाणा की नींव डालैंगे
गीत रणबीर सिंह नै बनाया मिलके मजदूर किसान गावांगे ||
जुलूस ----अश्वनी चौधरी
सुनो
कितना शोर उठता है
उस शहर से
जहाँ बसा करते थे ऐसे लोग
जो गूंगे समझे जाते थे
देखो
कितनी आसानी से नापते हैं
राह को कदम उनके
जिनकी आँखों पार पड़े थे परदे
देखो
कितने जोशीले हैं लोग
उठो--- देखो
आ गया है जुलूस
तुम्हारे घर के सामने
उठो
और शामिल हो जाओ
इस जुलूस में
कहीं ऐसा न हो
कि जुलूस निकलने के बाद तुम
दब कर रह जाओ
उसी गर्द के नीचे
जिसे तुम झाड़ नहीं पा रहे हो
उस डर के कारण जिसे बसा दिया है
तुम्हारे दिल में
उन मुठी भर लोगों ने
जिनके खिलाफ
काले झंडे लिए
जा रहे हैं
ये लोग
प्रयास पत्रिका
जन -फरवरी १९८३ अंक
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