Thursday, July 10, 2014

do chutkale

रमलू : मेरी बीवी मुझे छोड़ के चली गई. 
कमलू : तू उसका ख्याल नही रखता होगा. 
रमलू : अरे यार, सगी बहन की तरह रखता था.

नर्स- बधाई हो: आपके जुड़वा बेटे हुए हैं. 

रमलू : ये तो होना ही था. 
नर्स- क्यों? 
रमलू : जब देखो केबीसी पार्ट-2 देखती रहती थी, 
मिल गया न उम्मीद से दोगुना।

Tuesday, July 8, 2014

बड़ा मोर्चा

इसमें कोई शक नहीं कि आज का दौर काफी चुनौती पूर्ण है । खासकर वर्गीय संगठनों और सेकुलर विचार के लिए । इसके लिए सभी प्रगतील , जनवादी , खुले दिमाग विचारशील लोगों  , प्रो पीपल आंदोलनों व व्यक्तियों - सबको मिलकर  बड़ा मोर्चा बनाने का वक्त आ गया लगता है । 

स्वतंत्र वो वजूद

मेरा स्वतंत्र वो वजूद
मेरे से किसने पूच्छा था कि वहां
पैदा होना भी चाहता हूँ मैं कि नहीं
वो घर वो गाओं वो जिला वो प्रदेश
वो देश वो मजहब चिपक से गए
बिना कभी पूच्छे मेरे वजूद के साथ
बहुत बार अहसास करवाया जाता
मेरे इस प्रकार के अनचाहे वजूद का
मेरी मानवता मेरा स्वतंत्र वो वजूद
पता नहीं कहाँ खो गया ढूंढ रहा हूँ
ढूंढ नहीं पाया अभी तक तो शायद
कभी इसे ढूंढ भी पाऊंगा कि नहीं

rahbar


कुछ भी कहने से दिल आज बहुत ही डरता है
  
ये हर जगह पर चुप ही रहना पसंद करता है  

मौका मिलते ही ठग लेगा हमको मेरे यारो  

वही जो हमारे रहबर होने का ढोंग भरता है 


एक नया ट्रेंड

 एक नया ट्रेंड 
आज की मोहब्बत फेसबुक और व्हाट्सअप हो गई हैं बताते यारो 
धीरे - धीरे दोस्ती और फिर मोहब्बत का अहसास हैं  जताते यारो 
फिर नम्बरों का आदान प्रदान होता पूरी रात जागके बिताते यारो  
मोहब्बत के पाठ पढ़े जाते हैं ,वादों का सिलसीला है  चलाते यारो  
और फिर मॉल में मुलाकातें शुरू हो हाँ में हाँ कुछ रोज मिलाते यारो 
कुछ दिन का सिलसिला फिर किसी बात पर तकरार बनाते यारो 
और फिर अन्फ्रेंड का बटन दब जाता है सब कुछ फिर भुलाते यारो 
और फिर एक नया चेहरा उस पर लाइक कर  नया प्यार रचाते यारो 
सिलसिला जारी है चार के बाद पांचवें प्यार से फेरे फिर घुमाते यारो 
दो तीन साल चलता किसी तरह  फिर तलाक का परचम  उठाते यारो 

Monday, July 7, 2014

शिक्षा का बाजार और विश्व बैंक

शिक्षा का बाजार और विश्व बैंक
सन 1992 में शिक्षा नीति का संशोधित रूप प्रस्तुत करते हुए संसद ने तीसरी बार "समान स्कूल व्यवस्था " के प्रति अपनी कटिबद्धता जाहिर की । लेकिन इस संशोधित नीति ने भी एक ओर चंदेक चुने हुए विद्यार्थियों के लिए अति खर्चीले नवोदय विद्यालय और दूसरी और करोड़ों बल मजदूरों के लिए रात्रि कालीन औपचारिकेतर शिक्षा केन्द्रों की दोहरी नीति को आगे बढ़ाया ।  केवल इतना ही नहीं वरन 1994 से विश्व बैंक द्वारा पोषित जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (डी.पी.ई.पी.) के जरिये स्कूल विहीन गावों के लिए वैकल्पिक विद्यालय के नाम पर स्कूलों की एक और श्रेणी खड़ी की जा रही है । दरअसल ,शिक्षा एक बुनियादी हक़ के  रूप में नहीं , बल्कि एक आकर्षक धंधे के रूप में विकसित हो रही है । अब इसमें अनिवाशी भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनिया भी अपनी जगह बना रही हैं । इस माहौल में लुडलो कासल क्रं 2 के द्वारा अपनी बस को खचाखच भरकर मुनाफा कमाने की बात स्वाभाविक ही दिखती है , चूंकि शिक्षा एक व्यवसाय के रूप में स्वीकारी जा चुकी है । -----शिक्षा में बदलाव पेज --158  

सिस्टम और इंसान

सिस्टम और इंसान 
सिस्टम इन्सान को गढ़ता है
इंसानों से सिस्टम बनता है
अलग अलग नहीं ये दोनों
प्रभावित एक दूजे को करता
बदला है इसको  इंसानों ने
इसने इंसानों को बदला है
कुदरत के खिलाफ चला तो
इसे कुदरत ने सबक सिखाया
इतिहास गवाह  है इसका 
कुदरत माफ़ नहीं करती है 
देर सबेर पलट वार करती है 
इसलिए कुदरत के नियम 
जानना  बेहद जरूरी कहते
नियम जान उनकी हदों में
आजादी से विचरण कर सकते
कुदरत के खिलाफ जा कर
आजादी का मतलब बर्बादी
इतिहास गवाह है इसका
परिवर्तन हुए हैं और हों  रहे 
मगर परिवर्तन की पहचान
बहुत जरूरी है हमारे वास्ते
कुदरत नियमोंनुसार परिवर्तन
सही बदलाव कहलायेगा मगर
प्रतिगामी बदलाव हमें डबोयेगा
इसलिए वह सिस्टम जो कि
कुदरत हितैषी हों और हों
मानव हितैषी इसकी पहचान
बहुत ही जरूरी बात बताई
इतिहास गवाह है इसका ||